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44 प्राध्यापकों की एसीआर में पूअर लिखने के आदेश

5 वर्ष पहले
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अपने ही विषय की नहीं है सही जानाकरी

कोईभी प्राध्यापकों से बेहतर ज्ञान की अपेक्षा रखता है, लेकिन स्थिति तब काफी चिंताजनक हो जाती है जब प्राध्यापक अपने विषय के बारे में जानकारी तक नहीं दे पा रहे। यह हाल तब है जब ये सवाल उनकी पदोन्नति को लेकर लिए जा रहे टैस्ट में पूछे जा रहे हैं। अपने विषय और साक्षात्कार में 10 से कम अंक अर्जित करने वाले 44 सहायक प्रोफेसर की एसीआर में पुअर लिखने का आदेश विभाग ने कॉलेजों के प्रिंसिपल को दिया है। यही नहीं अब विभाग ने संबंधित कॉलेजों से इस बाबत जवाब-तलबी करने की भी तैयारी कर ली है। बताया गया है कि टैस्ट प्रक्रिया में सबसे ज्यादा इतिहास एवं भूगोल के प्राध्यापक फिसड्डी साबित हुए हैं। इतिहास में तो शून्य तक मिली है। जबकि गणित, अर्थशास्त्र एवं राजनैतिक विज्ञान में भी स्थिति चिंताजनक रही है।

विभागीय जानकारी के अनुसार पे-बैंड चार के लिए प्रदेश सरकार ने पहली बार साक्षात्कार विषयगत ज्ञान के साथ-साथ रिसर्च टीचिंग के अनुभव को शामिल किया था। इसके लिए 65 सहायक प्रोफेसर ने आवेदन किया। इनमें से तीन तो स्क्रीनिंग में ही बाहर हो गए। शेष 62 स्क्रीनिंग में पास हुए। रिसर्च और टीचिंग अनुभव में लगभग सभी 63 सहायक प्रोफेसर को कॉलेजों ने अपने स्तर पर अच्छे अंक देकर उत्तीर्ण कर दिया। असल परीक्षा तो इसके बाद हुई।

उच्चतर शिक्षा विभाग ने एक ओर जहां प्राध्यापकों की रिपोर्ट को चिंताजनक बताते हुए प्रिंसिपल को पुअर रिमार्क्स देने को कहा है। ऐसे में प्रिंसिपल वर्ग ने सवाल किया है कि जब ग्रेड दे ही दिया है तो तो फिर रिमार्क्स का क्या लाभ। इसका लाभ तब होता जब प्राध्यापकों पर कोई कार्रवाई की जाती। एेसे में सिर्फ नॉलेज सुधारने के निर्देश हालात को औपचारिकता से बढ़कर कुछ ही साबित करेगा।

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