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तिब्बत की धरोहर पारंपरिक संस्कृति व पर्यावरण का संरक्षण महत्वपूर्ण : दलाईलामा

Dainik Bhaskar

Nov 18, 2012, 01:32 AM IST

Dharmshala Zila News - तिब्बत की धरोहर पारंपरिक संस्कृति व पर्यावरण का संरक्षण महत्वपूर्ण : दलाईलामा

भास्कर न्यूज. धर्मशाला।...

तिब्बत की धरोहर पारंपरिक संस्कृति व पर्यावरण का संरक्षण महत्वपूर्ण : दलाईलामा
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तिब्बत की धरोहर पारंपरिक संस्कृति व पर्यावरण का संरक्षण महत्वपूर्ण : दलाईलामा

भास्कर न्यूज. धर्मशाला।

वैश्विक युग के इस दौर में तिब्बत की धरोहर पारंपरिक संस्कृति व पर्यावरण का संरक्षण महत्वपूर्ण है। तिब्बती बौद्ध संस्कृति शांति और अहिंसा की प्रतीक है, जिसके संरक्षण की बहुत अधिक जरूरत है, क्योंकि यह शांति, प्रेम और करुणा की परंपरा का निर्वाहन कर रही है। तिब्बती बौद्ध धर्म सिर्फ पूजा और अनुष्ठान नहीं है, बिना ज्ञान के पूजा का अभ्यास समय की बर्बादी है। यह उदगार शनिवार को तिब्बतियों के सर्वोच्च धर्मगुरु दलाईलामा ने मैक्लोडगंज के अप्पर टीसीवी में स्पेशल इंटरनेशनल तिब्बत स्पोर्ट ग्रुप के तीन दिवसीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में लोकतंत्र और स्वतंत्रता का रुझान बढ़ा है, जिससे चीन भी अछूता नहीं रह सकता। स्वतंत्रता और न्याय की प्रवृत्ति को अपनाना वर्तमान दौर की जरूरत है।

कठिन दौर से गुजर रहा तिब्बत

तिब्बत कठिन दौर से गुजर रहा है, इस कठिनतम घड़ी में तिब्बतियों का साथ देने के लिए आपने यहां एकत्रित होकर गहरी चिंता और समर्थन व्यक्त किया है। हमारे समर्थक तिब्बत को समर्थन नहीं दे रहे, बल्कि न्याय और अहिंसा का रास्ता अपनाते हुए तिब्बत आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं। तिब्बतियों का संघर्ष अहिंसा के लिए है। दुनिया में दूसरे समुदाय भी दुर्भाग्य से कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं, उनका उद्देश्य महान है, लेकिन वह अपनी समस्याओं के हल के लिए हिंसक तरीकों को अपना रहे हैं। ऐसे में आपका समर्थन हमारे लिए प्रोत्साहन वर्धक व व्यवहारिक है।

सफल होने चाहिए अहिंसक आंदोलन

अहिंसक आंदोलन सफल होना चाहिए नहीं तो लोगों का अहिंसा से विश्वास ही उठ जाएगा। कभी-कभी लोग अपनी स्वार्थ सिद्धी व समस्याओं के समाधान के लिए हिंसा को अपना लेते हैं, यह सरासर गलत है। हिंसा क्रोध से आती है, जब आप में आत्मविश्वास की कमी होती है, तभी आप अपनी समस्याओं के समाधान के लिए बंदूक का सहारा लेते हैं। इसलिए दुनिया में सख्ती से अहिंसक तरीकों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। दलाईलामा ने कहा कि चीन के लोकतंत्र समर्थकों ने भी हमारे आंदोलन के प्रति अपनी एकजुटता व्यक्त की है। तिब्बत आंदोलन को तीन भागों में विभक्त करते हुए उन्होंने कहा कि तिब्बत को दुनिया की छत कहा गया है, ऐसे में तिब्बत के पर्यावरण की रक्षा के लिए हम सभी को प्रभावी कदम उठाने होंगे।

भारत व चीन के संबंध वास्तविक शांति, आपसी विश्वास व सहयोग पर आधारित हों

भारत सर्वाधिक लोकतांत्रिक आबादी वाला देश है, जबकि चीन सबसे अधिक आबादी वाला देश। भारत व चीन के संबंध वास्तविक शांति, आपसी विश्वास व सहयोग पर आधारित हों, इससे दोनों देशों को बहुत लाभ मिलेगा। दलाईलामा ने कहा कि मैं तिब्बत के मुद्दे के राजनीतिक पहलू पर कुछ नहीं कहूंगा, क्योंकि मैं रिटायर हो चुका हूं, निर्वाचित तिब्बती नेतृत्व तिब्बत के बारे में जो कहते हैं वह बिल्कुल सही है। तिब्बत में हालात काफी गंभीर हैं, जो एक बड़ी समस्या है, यह न तो तिब्बतियों के लिए अ'छी है न ही चीनी लोगों के लिए। दलाईलामा ने कहा कि तिब्बत वर्तमान युवा पीढ़ी में भावना व एकता मेरी पीढ़ी की तुलना में अधिक है।

फोटो : 17डीएसएलए-6

कैप्शन : तिब्बतियों के सर्वोच्च धर्मगुरु दलाईलामा मैक्लोडगंज के अप्पर टीसीवी में आयोजित किए जा रहे स्पेशल इंटरनेशनल तिब्बत स्पोर्ट ग्रुप के तीन दिवसीय सम्मेलन के दौरान शनिवार को विश्व भर के 43 देशों के 200 से अधिक तिब्बती प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए।

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