दवाई में गुणवत्ता जरूरी: कौल
स्वास्थ्यएवं परिवार कल्याण, राजस्व विधि मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने देश एवं प्रदेश के दवाई निर्माताओं का आह्वान किया है कि वे दवा निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान रखते हुए यह सुनिश्चित बनाएं कि बेहतर क्षमता की सस्ती दवाइयों तक आम जनता की पहुंच हो। ठाकुर कौल सिंह शुक्रवार को नालागढ़ उपमंडल के बद्दी में ‘नार्थ इंडिया मैन्युफेक्चरर्स कॉनक्लेव’ को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार विश्व एवं देश के उपभोक्ताओं को श्रेष्ठ गुणवत्ता की दवाईयां उपलब्ध करवाने के लिए वचनबद्ध है इस दिशा में कोई समझौता नहीं किया जाएगा। प्रदेश सरकार दवा निर्माताओं को सभी आधारभूत सुविधाएं देने के लिए प्रयासरत है। प्रदेश सरकार ने उद्योग जगत की सुविधा के लिए वर्ष 2013 में ही बिक्री लाइसेंस ऑनलाइन जारी करने आरंभ कर दिए थे। शीघ्र ही प्रदेश सरकार उत्पादन लाइसेंस भी ऑनलाइन जारी करना आरंभ करेगी। इससे विभागीय दक्षता में बढ़ोतरी होने के साथ-साथ संपूर्ण प्रक्रिया में पारदर्शिता भी आएगी।आज पर्यावरण में बदलाव एवं अन्य कारणों के दृष्टिगत विश्व को नित नई बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। भारत भी इन बदलावों से अछूता नहीं है। उन्होंने जीका वायरस की चर्चा करते हुए दवा उद्योग से आग्रह किया कि अनुसंधान एवं दवा विकास पर ध्यान दिया जाए ताकि सस्ती एवं भरोसेमंद दवाइयां उपलब्ध हो सकें। उन्होंने अधिक से अधिक पेटेंट देश के नाम करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
बीपीएलपरिवारों के लिए औषधियां की रवाना
इससेपूर्व ठाकुर कौल सिंह ने प्रदेश के गरीबी रेखा से नीचे रह रहे परिवारों के लिए बद्दी से औषधियां रवाना की। दवाइयां मंडी, शिमला और कांगड़ा जिलों के बीपीएल परिवारों को दी जाएंगी।
सीकरी ने दी कॉनक्लेव की जानकारी
भारतीयदवा निर्माता संघ के बीआर सीकरी ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया और कॉनक्लेव के उद्देश्य का जानकारी प्रदान की। हिमाचल दवा निर्माता संघ के अध्यक्ष एसएल सिंगला ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। अतिरिक्त सचिव केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय केबी. अग्रवाल, जिला परिषद सोलन के अध्यक्ष धर्मपाल, बद्दी नगर परिषद के अध्यक्ष मदन चौधरी, ललित जैन, एसडीएम मीणा, जिला कांग्रेस अध्यक्ष राहुल ठाकुर, प्रदेश पर्यटन विकास निगम के निदेशक सुरेन्द्र सेठी सहित कई उपस्थित थे।
हिमाचल की 30 हजार करोड़ से अधिक की हिस्सेदारी
ठाकुरकौल सिंह ने कहा कि वर्तमान में हिमाचल प्रदेश दवा निर्माण का प्रमुख केन्द्र बन कर उभरा है। 1 लाख 30 हजार करोड़ के दवा बाजार में हिमाचल की हिस्सेदारी 30 हजार करोड़ से अधिक है। उन्होंने कहा कि इसमें से 9500 करोड़ से अधिक की दवाएं निर्यात की जा रही हैं। देश में बिक रही प्रत्येक तीसरी दवाई हिमाचल की बनी हुई है। प्रदेश सरकार के प्रयासों से हिमाचल में 600 से अधिक दवा कंपनियां कार्यरत हैं।
नकली दवाइयों पर रखें नजर
स्वास्थ्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष मार्च तक बद्दी में राज्य दवा नियंत्रक के कार्यालय का अपना भवन बन का तैयार हो जाएगा। उन्होंने दवा निर्माताओं से आग्रह किया कि गुणवत्तायुक्त उत्पादन के साथ-साथ नकली दवाइयां बनाने वालों पर नजऱ रखें और इस अवैध कारोबार को जड़ से समाप्त करने में सरकार को सहयोग दें। ठाकुर कौल सिंह ने कहा कि लघु एवं मध्यम दवा उद्योगों को क्षेत्रीय विपणन एवं विभिन्न प्रदेशों की विशेष आवश्यकताओं पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन उद्योगों को केन्द्रीय एवं प्रदेश सरकार के अधीन कार्यरत अस्पतालों एवं अन्य संस्थानों की दवा आपूर्ति प्रक्रिया में नियमित रूप से भाग लेना चाहिए ताकि दोनों परस्पर रूप से लाभान्वित हो सकें एवं गुणवत्ता बनी रहे। उन्होंने कहा कि आज के समय में रोगी तक उचित दवा की उपलब्धता भी एक प्रमुख चुनौती बन कर उभरी है।
बद्दी में नार्थ इडिंया मैनुफैक्र्रज़ कॅनक्लेव में पहुंचने पर स्वास्थ्य मंत्री ठाकुर कौल सिंह का स्वागत करते आयोजन कांग्रेस नेता।