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डिप्टी डायरेक्टर ऑफिस में मनमर्जी से ट्रांसफर

5 वर्ष पहले
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भर्तीतोस्कूलों में स्टूडेंट्स को पढ़ाने के लिए हुई थी, लेकिन यहां स्थित सेकंडरी डिप्टी डायरेक्टर कार्यालय शिक्षकों की सैरगाह बन गया है। जिन टीचर्स की तैनाती स्कूलों में होनी चाहिए उन्हें मनचाहे स्टेशन की चाह से भटक कर सरकार और शिक्षा विभाग के अधिकारी डिप्टी डायरेक्टर कार्यालय में भेज रहे हैं। इनका आंकड़ा अब एक बार फिर बढ़ने लगा है। दिलचस्प बात यह है कि जिन स्कूलों से ये टीचर्स ट्रांसफर होकर आए हैं सैलरी वहीं से ड्रा हो रही है।

इस माह भी कुछ और टीचर्स ने यहां ज्वाइन किया है। हालत ये है कि इस कार्यालय का माहौल ही अब इनकी ज्वाइनिंग के बाद बेवजह ही खराब हो रहा है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों और सरकार की अपनों को बेवजह ही एडजेस्ट करने की ख्वाहिश स्टूडेंट्स पर भारी पड़ रही है। सेकंडरी डिप्टी डायरेक्टर कार्यालय में नए शिक्षकों के जुड़ने से अब तादाद 8 हो गई है। जिनमें दो कैमेस्ट्री, 4 वोकेशनल, एक-एक हिंदी और हिस्ट्री विषय के हैं। दो दिन पहले इस कार्यालय में हिंदी के जिस शिक्षक का तबादला यहां हुआ है उसका पिछला स्टेशन बड़ा में है। तबादला तो हमीरपुर सीसे स्कूल बाल में बच्चों को पढ़ाने के लिए अदला-बदली में हुआ था। लेकिन शिक्षकों की पहुंच सरकार की इस ट्रांसफर पॉलिसी को जिस तरीके से कटघरे में खड़ा कर रही है लगता नहीं कि नेताओं को स्टूडेंट्स की जरा भी फिक्र है। क्योंकि बड़ा सीसे स्कूल से जिस महिला टीचर को बाल स्कूल हमीरपुर में भेजा गया उसके एवज में जिस टीचर को बड़ा जाना था वे भी प्रेस्टीज इश्यू पर सवार होकर तबादले को रुकवाने को कामयाब हो गए। फिर क्या था जो टीचर ज्वाइन किए थे उनकी एडजस्टमेंट डिप्टी डायरेक्टर कार्यालय में हो गई और खुद पुराने स्टेशन पर ही रहे।

हाजिरी को भी इस कार्यालय में अब अलग-अलग मापदंड तैयार हो गए हैं। कई टीचर्स की हाजिरी कार्यालय के दूसरे कर्मचारियों की तरह वायो-मीट्रिक मशीन से हो रही है। जबकि कइयों की हाजिरी पुराने रजिस्ट्रार पर ही अंकित की जा रही है। दरअसल में डिप्टी डायरेक्टर कार्यालय भी करे तो क्या क्योंकि उच्चाधिकारियों के आदेश ही ऐसे हैं कि इन टीचर्स के लिए इस कार्यालय में काम करने लायक कुछ भी नहीं है।

^दो कैमेस्ट्री के, 4 वोकेशनल के, एक-एक हिंदी और हिस्ट्री के टीचर यहां हैं। इनके बारे में उच्चाधिकारियों को लिखा गया है। कार्यालय की जरूरत के मुताबिक इन्हें काम आवंटित किया गया है। सरकार के जो आदेश हैं उन्हीं के मुताबिक इनकी यहां ज्वाइनिंग हुई है। सोमदत्तसांख्यान, डिप्टी डायरेक्टर सेकंडरी एजुकेशन हमीरपुर

एक टीचर डायरी डिस्पैच में किया तैनात

ताज्जुबकी बात यह है कि एक टीचर को इस कार्यालय में डायरी डिस्पैच में तैनात कर दिया है। ताकि कुछ तो काम मिले। वोकेशनल विषय के जिन 4 टीचर्स को यहां तैनात किया गया है ये सारे अस्थाई तौर पर यानी डेपुटेशन के आधार पर एडजेस्ट किए गए हैं। इनमें कइयों के पद स्कूलों में खत्म होने की वजह बताई जा रही है। लेकिन शिक्षकों के पद खत्म हो गए तो इन्हें क्लर्क बनाना शिक्षा विभाग के जहन में आखिर कहां से गया। ये शिक्षक कब तक इसी कार्यालय में तैनात रहेंगे इसका किसी को पता नहीं। लेकिन यदि केमिस्ट्री जैसे महत्वपूर्ण विषय के टीचर्स को भी यदि सरकार और उसका विभाग डिप्टी डायरेक्टर कार्यालय में बिठा दे तो फिर स्कूलों में कौन पढ़ाएगा। जहां पर इनकी पहले से ही कमी है। क्योंकि जिस स्कूल से ये ट्रांसफर होकर आए हैं उनके बदले में वहां और शिक्षक भी तो तैनात नहीं हो सकता। अब इस कार्यालय के गले पड़े इन आठ टीचर्स पर सरकार मौन है। शिक्षा विभाग के अधिकारी चुप हैं। वे भी तब जब मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह बार-बार यह कह चुके हैं कि डेपुटेशन नहीं होंगे। अब लगता यही है कि सरकार की करनी और कथनी मनचाहे स्टेशन की चाह में भटके अपनों के लिए बदल चुकी है।

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