एक हेक्टेयर वन भूमि में निर्माण को मिली छूट
वनभूमिपर िवकास के लिए होने वाले 13 प्रकार के निर्माण कार्याें के लिए अब वन मंत्रालय में फाइलें नहीं घूमेंगी। अब ग्रामसभा और वन विभाग के डीएफओ को ही एक हैक्टेयर तक निर्माण के लिए भूमि हस्तांतरण की शक्तियां दी गई हैं।
नई पंचायतें अब ग्राम सभा से प्रस्ताव पारित कर एनओसी देगी और वन विभाग के डीएफओ उस वन भूमि को ट्रांस्फर करेगा। इसके लिए मिनिस्ट्री ऑफ ट्राइबल अफेयरर्स ने अधिसूचना जारी कर दी है। लिहाजा, अब छोटे-छोटे निर्माण कार्य के लिए सालों तक वन मंत्रालय में फाइलें नहीं घूमेंगी।
फोरेस्ट राइट एक्ट में प्रावधान: मिनिस्टीऑफ ट्राइबल अफेयरर्स ने सेंट्रल एक्ट के तहत फोरेस्ट राइट एक्ट में प्रावधान किया है कि एक हेक्टयेेेटर तक के निर्माण के लिए वन मंत्रालय की मंजूरी लेना जरूरी नहीं है। इसके लिए स्थानीय स्तर पर पंचायतों की ग्रामसभा को एनओसी जारी करने की शक्तियां दी गई हैं। ग्रामसभा प्रस्ताव से उसके लिए एनओसी जारी करेगी। जबकि वन विभाग के डीएफओ वन भूमि को ट्रांस्फर करने के लिए अधिकृत होगा।
मंत्रालय ने शक्तियां दी
^एकहेक्टेयर तक के निर्माण कार्य के लिए ग्रामसभा और वन विभाग के डीएफओ को भूमि हस्तांरण के लिए पावरें दी गई हैं। वन संरक्षण अधिनियम (एफसीए) को प्रभावी ढंग से लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जारी की गई अधिसूचना के अनुसार एफसीए को लागू किया जाएगा। विनयसिंह ठाकुर, एडीएम कुल्लू
एफआरए कमेटी भी अहम
इसतरह के निर्माण के लिए पंचायत स्तर पर बनी एफआरए कमेटी अहम भूमिका निभाएगी। इस कमेटी की संस्तुति के बिइना डीएफओ भी उपरोक्त निर्माण के लिए भूमि का हस्तांतरण नहीं कर सकता जब तक ग्रामसभा से एफआरए कमेटी की एनओसी मिले।
सैकड़ों मामलों में राहत
प्रदेशमें सैकड़ों सड़कें हैं जो एफसीए में लटकी हैं। इतना ही नहीं ऐसे कई निर्माण डिस्पेंसरी, विद्युत सब स्टेशन, स्कूल भवन, पंचायत घर रुके हुए हैं जिनके निर्माण के लिए वन मंत्रालय में फाइलें पड़ी हैं। लेकिन अब इन निर्माण कार्यों के लिए स्थानीय स्तर पर ही स्वीकृति मिल जाएगी।
75 पेड़ोंको वन भूमि में काटने की अनुमति भी इसी प्रक्रिया के तहत ही मिल जाएगी। परंतु यदि 75 पेड़ों के अिधक पेड़ और एक हेक्टेयर भूमि से अधिक का मसला हो तो ऐसे निर्माण कार्य की फाइल वन मंत्रालय ही स्वीकृति के लिए जाएगी।
सड़क, डिस्पेंसरी, स्कूल भवन के लिए छूट
एकहेक्टेयर वन भूमि के अंदर बनने वाले कम्युनिटी भवन, अस्पताल, बिजली बोर्ड का सब स्टेशन, डिस्पेंसरी, सड़क, ट्राॅसमिशन लाइन, टावर, स्कूल भवन, पीएचसी सहित ऐसे 13 निर्माण कार्य हैं जिसके लिए वन मंत्रालय में फाइलें नहीं भेजनी होंगी बल्कि स्थानीय स्तर पर ग्राम पंचायत और वन विभाग इसके लिए अनुमति देने के लिए अधिकृत होगा।