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नालागढ़ ब्लड स्टोरेज यूनिट मदर बैंक से नहीं जुड़ सका
उपमंडलके सबसे बड़े नालागढ़ अस्पताल में ब्लड स्टोरेज सेंटर बने 9 माह बीत गए है, लेकिन यह अभी तक मदर बैंक से नहीं जुड़ सका है। अस्पताल के दो डाॅक्टरों ने इसके लिए ट्रेनिंग भी ले ली है, लेकिन टेक्नीशियन के अभाव में आज तक यह वर्किंग में नहीं सका है। नतीजतन अभी तक इसमें ब्लड की सुविधा मुहैया ही नहीं हो पाई है और लोगों को आपरेशन के समय ब्लड लेने के लिए पड़ोसी राज्यों सहित जिला अस्पताल निजी अस्पतालों पर निर्भर होना पड़ रहा है।
अस्पताल के नए भवन के पुराने कैजुअल्टी वार्ड में ब्लड स्टोरेज सेंटर स्थापित तो कर दिया है और इसकी मशीनरी, फ्रिज, क्रॉस मैचिंग के लिए ब्लड टैस्टिंग लैब सुविधा आदि उपलब्ध है, लेकिन यह अभी तक कार्य में नहीं आया है। इसे जिला अस्पताल के मदर ब्लड बैंक के साथ रजिस्ट्रड करवाना है, जो अभी तक नहीं हो पाया है, जिसके चलते इस ब्लड स्टोरेज सेंटर ने अपना कार्य करना शुरू ही नहीं किया है।
स्वास्थ्यमंत्री के समक्ष उठाया था मामला
बीतेवर्ष 22 अप्रैल को स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने नालागढ़ दौरे के दौरान क्षेत्र के लोगों ने नालागढ़ अस्पताल में ट्रामा सेंटर ब्लड स्टोरेज सेंटर की मांग पूरजोर ढंग से उठाई थी। वर्ष 2003 में प्रदेश को मिले औद्योगिक पैकेज मिलने के बाद जहां क्षेत्र में रिकार्ड औद्योगिकरण हुआ है, वहीं क्षेत्र में वाहनों की संख्या में भी आशातीत वृद्धि हुई है। वाहनों की संख्या में इजाफा होने से क्षेत्र में सड़क हादसों में भी वृद्धि हुई है, जिसके चलते आए दिन कोई कोई दुर्घटना घटती रहती है।
अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ आदि चिकित्सक यहां आपरेशन करते हैं। एनेमिक रोगी, स्त्री प्रसूति के समय, एक्सीडेंट में घायल रोगियों, मेजर सर्जरी आदि के लिए रक्त की कई बार जरूरत पड़ती है। जब मरीज के तीमारदार रक्त देने के लिए तैयार हो जाते हैं तो उन्हें रक्त देने के लिए भी इस सेंटर आवश्कयता है, क्योंकि क्रॉस मैचिंग के बाद ही रक्त बदला जाता है। अस्पताल में ब्लड स्टोरेज सेंटर के चालू होने से या तो पड़ोसी राज्य पंजाब के रोपड़, जिला अस्पताल या फिर निजी अस्पतालों से ब्लड के लिए मरीजों के तीमारदारों को भटकना पड़ता है। इससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
बीएमओ नालागढ़ डॉ.कुलदीप जसवाल ने कहा कि ब्लड स्टोरेज सेंटर में टेक्नीशियन होने के चलते यह वर्किंग में नहीं आया है और जल्द ही टेक्नीशियन मुहैया हो जाएगा तो यह सेंटर भी काम करना शुरू कर देगा। इससे लोगों को रही परेशानियों से निजात मिल जाएगी।
{2 डाॅक्टरों ने ली है ट्रेनिंग, टेक्नीशियन होने से अटका काम
{ब्लड मिलने से निजी पीजीआई अस्पताल का लेना पड़ता है सहारा