मिल्क प्लांट दोबारा होगा चालू
नालागढ़शहर में स्थित 90 के दशक से बंद पड़े मिल्क प्लांट अब जल्द ही प्रोसेसिंग में जाएगा।
इससे दुग्ध उत्पादकों को सीधा लाभ मिलेगा, वहीं लोगों को भी दूध दूध से बने उत्पाद मुहैया होंगे। इसके लिए 2 करोड़ रुपए की धनराशि खर्च करके इस यूनिट में एक पैकिंग मशीन, कोल्ड स्टोर, 10 हजार लीटर क्षमता का एक टैंक और दो पांच हजार लीटर क्षमता वाले टैंक स्थापित किए गए है और इन्हीं स्टोरेज टैंकों में दूध का भंडारण होगा। इसके लिए ट्रायल शुरू कर दिया गया है, वहीं विद्युत बोर्ड भी 11केवी बड़ी लाईन का कनेक्शन दे दिया है। कुल मिलाकर यह मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट अब दोबारा अपना काम करना शुरू कर देगा। इस बारे में मिल्क फेडरेशन के प्रबंधक निदेशक अश्वनी ठाकुर ने कहा कि नालागढ़ के मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट का काम करीब करीब मुक मल कर दिया गया है और जल्द ही इसे चालू कर दिया जाएगा और इसके शुरू होने से निश्चित तौर पर दुग्ध उत्पादकों को जहां लाभ मिलेगा, वहीं लोगों को भी दूध दूध से बने उत्पाद यहीं मुहैया होंगे।
सेल काउंटर खोलने को-ऑपरेटिव सोसायटी की भी योजना
सरकारने इसका विस्तार करके अब मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट का नाम देकर इसके जीर्णोद्घार का काम बीते चार वर्षों से शुरू करवाया है, जो करीब करीब पूरा हो चुका है। इस यूनिट के शुरू होने से दूध दूध से बने उत्पाद अब यहीं लोगों को मुहैया होंगे, जिसके लिए यूनिट के बाहर सेल काउंटर खोले जाने की योजना है। इस मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट के शुरू होने से क्षेत्र के दुग्ध उत्पादकों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। मिल्क फेडरेशन इसके लिए ग्रामीण स्तर पर को आपरेटिव सोसायटी खोलेगी, जो महिला को आपरेटिव सोसायटी भी हो सकती है, जहां क्षेत्र के लोग महिलाएं इन को आपरेटिव सोसायटी को चलाएगी और ग्रामीण अपना दूध यहां सोसायटी को देंगे और सोसायटी से सीधा यह दूध मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट में पहुंचेगा। इससे जहां वर्तमान में घर घर जाकर दूध बेच रहे दुग्ध उत्पादकों को कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, वहीं उन्हें इसके अच्छे दाम घर बैठे ही मिल सकेंगे, जिससे दुग्ध उत्पादकों की चिरलंबित समस्या हल होगी।
दो करोड़ की धनरािश की जा रही खर्च