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मां बालासुंदरी के दर्शनों को पहुंचे हजारों

7 वर्ष पहले
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जयकारों के साथ पहुंचे मां के दरबार

पहलेअश्विन नवरात्र पर जिला के प्रसिद्ध दिव्य शक्तिपीठों में हजारों श्रद्धालुओं ने शीश नवाया। त्रिलोकपुर स्थित माता बालासुंदरी मंदिर में 19 हजार श्रद्धालु माता के दर्शनों के लिए पहुंचे। कई श्रद्धालुओं को कतारों में खड़े होकर दर्शनों के लिए इंतजार करना पड़ा। वहीं कालीस्थान मंदिर नाहन, माता बाला सुंदरी मंदिर जमटा, बनोग स्थित माता बाला सुंदरी मंदिर के अलावा भंगायणी मंदिर हरिपुरधार समेत जिला के कई मंदिरों में सुबह से भारी श्रद्धघालु उमड़े। श्रद्धालुओं ने माता के दरबार में शीश नवाकर अपने परिवार के लिए सुख, शांति समृद्धि के लिए मन्नतें मांगी।

माता बालासुंदरी मंदिर त्रिलोकपुर में श्रद्धालुओं ने साढ़े पांच लाख रुपए का नकद चढ़ावा चढ़ाया। नकदी के अलावा एक ग्राम 200 मिलीग्राम सोना लगभग आधा किलो चांदी चढ़ावे के रूप में श्रद्धालुओं ने अर्पित की।

उतर भारत के प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां बाला सुंदरी मंदिर त्रिलोक पुर में सुबह तड़के पांच बजे पूजा अर्चना की गई। पूजा अर्चना के बाद मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनों के लिए खोल दिए गए। कई श्रद्धालु बुधवार रात से ही दर्शनों के इंतजार में ठहरे थे।

सुबह कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं का तांता लग गया। दिनभर मंदिर में भारी भीड़ जुटी। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड यूपी आदि राज्यों के श्रद्धालुओं ने यहां पहुंचकर माता का दीदार किया।

हरिपुरधार के मां भंगायणी मंदिर में जुटे श्रद्धालु।

नाहन के त्रिलोकपुर मंदिर में जुटी श्रद्धालुओं की भीड़।

सोलन के शूलिनी मंदिर में शीश नवाते श्रद्धालु।

सोलन के शूलिनी मंदिर में शारदीय नवरात्रों के पहले दिन लगी श्रद्धालुओं की कतार।

हरिपुरधार| शारदीयनवरात्र के पहले दिन गिरिपार क्षेत्र के सभी देवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। प्रसिद्घ मां भंगायणी मंदिर में नवरात्र के पहले दिन 5 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने माता के दर मे शीश नवाया। ठंड अधिक होने के कारण पहले दिन चूड़धार के शिरगुल मंदिर में काफी कम श्रद्धालु पहुंचे। नैनीधार, द्राबिल, देवामानल, गैलियो, बढ़ोल पंजाह आदि मंदिरों में श्रद्धालुओं की दिन भर तांता लगा रहा। समूचा गिरिपार क्षेत्र दिनभर माता के जयकारो से गूंज उठा। मां भंगायणी मंदिर समिति के महासचिव मोहर सिंह राणा ने बताया कि भंगायणी मंदिर में 9 दिनों तक भ