पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • नौतोड़ भूमि पर मिली राहत से किन्नौरवासी खुश

नौतोड़ भूमि पर मिली राहत से किन्नौरवासी खुश

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
संघ ने किया वकीलों का धन्यवाद

संघके अध्यक्ष बालकराम नेगी ने कहा कि इस आदेश के बाद किन्नौर सहित अन्य जिलों में जहां पर जनजातीय लोग रहते है हड़कंप मच गया है। मौजूदा समय में जिला किन्नौर में नौतोड़ भूमि पर केवल ग्रामीणों के सेब के बागीचे है बल्कि कई लोगों ने अपनी पूरी जिंदगी की कमाई खत्तम हो जाती। यहा तक की उस भूमि पर उन्होंने आशियाने तक बनाए है। इस राहत से जिला किन्नौर के लोगों ने राहत की सांस ली है। संघ के सैकड़ों सदस्यों ने राहत की सांस ली है और इस मामले में सर्वोच्च न्यायलय में केस लड़ रहे सभी वकीलों का धन्यवाद किया है।

भास्कर न्यूज | रामपुर बुशहर

अनुसूचितजनजाति एवं अनुसूचित जाति सेवानिवृत एवं सेवारत कर्मचारी एवं अधिकारी संघ ने सर्वोच्च न्यायलय से नौतोड़ भूमि पर आए फैसले से जिला किन्नौर के पंजीकृत 534 परिवारों सहित हजारों ग्रामीणों को राहत मिली है। संघ के अध्यक्ष बालकराम नेगी ने कहा कि उच्च न्यायलय ने साफ शब्दों में ये आदेश जारी कर दिए थे कि एक वर्ष के भीतर उन लोगों के जमीन को वापिस सरकार के समक्ष कर दिया जाए जिनके पास नौतोड़ भूमि थी। इस आदेश के बाद पांगी, भरमौर, लाहौल स्पीति, डोडरा क्वार पंद्रहबीस क्षेत्र के उन सैकड़ों लोगों को राहत मिली है जिनके पास नौतोड़ भूमि थी। संघ ने कहा कि मौजूदा समय में जिला किन्नौर में नौतोड़ भूमि पर केवल ग्रामीणों के सेब के बागीचे है बल्कि कई लोगों ने अपनी पूरी जिंदगी की कमाई से अपने आशियाने तक बनाए है। ऐसे में अगर उच्च न्यायलय के आदेश लागू होते थे तो कई ग्रामीण सड़क पर जाने थे। लेकिन सर्वोच्च न्यायलय में संघ के अध्यक्ष बालकराम नेगी द्वारा दायर की गई याचिका पर सकारात्मक रवैया अपनाए हुए न्यायलय ने इस आदेश पर स्टे लगा दिया है। संघ ने कहा कि इस मामले में केके वेगुगोपाल ने बड़ी गंभीरता से सर्वोच्च न्यायलय के समक्ष जनजातीय लोगों का पक्ष रखा। अध्यक्ष ने कहा कि जनजातीय एवं अनुसूचित जनजाति पर आय का मापदंड लागू नहीं होता। इसी बात पर वह सर्वोच्च न्यायलय गए और वहां से उन्हे एक बड़ी राहत मिली है।

खबरें और भी हैं...