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कंड़ाघाट में फसलों को चट कर रहे जंगली जानवर

7 वर्ष पहले
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कंडाघाटउपमंडल की ग्राम पंचायत काहला, सायरी, ममलीग, कोट, क्वारग, वाकना के कई गांवों में जंगली जानवरों ने आतंक मचाया हुआ है। जंगली जानवर रातों-रात खेतों में खड़ी फसलों या बिजाई रोपाई की हुई फसलों को तहस-नहस करके किसानों की रोजी को समाप्त कर रहे हैं। इन दिनों किसान खेतों में रबी के मौसम में लगने वाली गेहूं, जौ, मटर, सरसों, मूली अािद लगा रहे हैं। जंगली सुअर रात को किसानों के खेतों में आकर उन्हें उजाड़ जाते हैं।

क्षेत्र के किसान भगवान सिंह, इंद्र सिंह ठाकुर, दयाकृष्ण, देविंद्र ठाकुर, ज्ञान ठाकुर, तारा दत्त शर्मा, पूर्ण ठाकुर सहित दर्जन लोगों ने बताया कि खेतों में भारी मेहनत करके महंगे बीज लगाकर फसलें उगाते हैं। जंगली सुअर रात को आकर उन्हें उखाड़कर समाप्त कर जाते हैं और दिन के समय जंगल में मौजूद झाडि़यों में छुप जाते हैं। उन्होंने बताया कि किसान बार-बार जंगली जानवरों से छुटकारा दिलाने की मांग करते रहे हैं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं। किसानों की मांग है कि सुअरों द्वारा उजाड़ी फसलों का उन्हें तुरंत मुआवजा दिया जाए। जंगली सुअरों में फसल उजाड़ने की भारी क्षमता है। ग्रामीणों ने बताया कि एक सुअर चाहे तो एक रात में 15 से 20 बीघा फसल चौपट कर सकता है।

मुआवजा,जंगली जानवर मार सकते हैं : डीएफओ. वनविभाग सोलन के डीएफओ डीआर महाजन ने बताया कि जंगली सुअर या कोई भी वन्य प्राणी किसानों की फसलें नष्ट करता है तो मुआवजे का कोई प्रावधान नहीं है। हाईकोर्ट के निर्देशानुसार किसी भी वन्य प्राणी को मार नहीं सकते हैं।