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सरकार को हर साल दो करोड़ का चूना

6 वर्ष पहले
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शहर के लोग हर सुविधा तो चाहते हैं, लेकिन यहां नगर परिषद की ओर से लगाए जाने वाले टैक्स देने से बचते हैं। अकेले कंजरवेंसी टैक्स (सफाई कर) देने से सरकार को सालाना करीब दो करोड़ रुपए का चूना लग रहा है।

शहर के बिल्डरों ने करोड़ों रुपए के फ्लैट बनाकर बेच दिए, पर टैक्स के नाम पर एक रुपया भी नगर परिषद को नहीं दिया। शहर में बने होटल, रेस्तरां, बैंक, पीजी हाउसिस कई औद्योगिक इकाइयां भी कंजरवेंसी टैक्स नहीं दे रहे। नगर परिषद अब टैक्स डिफल्टरों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी कर रही है। बिल्डर अन्य भवन मालिक यह टैक्स दें तो इससे शहर में कई विकास कार्य हो सकते हैं।

सर्वेमें सामने आए तथ्य

घाटेसे जूझ रही सोलन नगर परिषद आय के स्रोत खोज रही है,लेकिन टैक्स नहीं ले पा रही है। नगर परिषद की ओर से करवाए गए एक सर्वे में यह तथ्य सामने आए हैं कि शहर के बिल्डरों ने करीब 810 फ्लैट बनाकर बिना कंजरवेंसी टैक्स दिए ही बेच दिए। बहरहाल टैक्स देकर सरकार को हर साल करोड़ाें का चूना लगाया जा रहा है।

नगर परिषद ने सर्वे कर लगाया टैक्स देने वालों का पता, कार्रवाई की तैयारी

10 % छूट के बाद लगता है 0.5 फीसदी टैक्स

नियमोंके अनुसार बिल्डरों को फ्लैटों की बिकी हुई कीमत पर 10 फीसदी छूट के बाद 0.5 फीसदी कंजरवेंसी टैक्स के तौर पर देना होता है, जबकि बिल्डर और भवन मालिक नियमों को धत्ता बताते हुए चांदी काट रहे हैं। शहर में बिल्डरों ने 25 से 50 लाख रुपए तक के फ्लैट बनाकर बेच दिए हैं। शहर के आधा दर्जन बड़े बिल्डरों ने सैकड़ों फ्लैट बनाकर बेच दिए हैं। इसके अलावा बड़े-बड़े शोरूम भी यहां खुल गए हैं, जबकि इन फ्लैटों को बेचने के एवज में करीब एक करोड़ रुपए का टैक्स नगर परिषद को मिलना चाहिए।

नगर परिषद को डिफॉल्टर लोग नियमित कंजरवेंसी टैक्स दें तो शहर में कई विकास कार्य हो सकते हैं। नगर परिषद को पार्कों के सौंदर्यीकरण फुटपाथ के लिए प्रायोजकों का मुंह ताकना पड़ रहा है।

^कंजरवेंसी टैक्स नहीं देने वालों का पता लगाया गया है। नए वित्त वर्ष के बाद जो भी टैक्स नहीं देगा उसके खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। डिफॉल्टरों के खिलाफ संपति अटेचमेंट की भी कार्रवाई हो सकती है। बीआरनेगी, ईओ, नगर परिषद

होटल, बैंक पीजी मालिक भी नहीं देते टैक्स

सर्वेमें यह बात सामने आई है कि बिल्डरों के अलावा कंजरवेंसी टैक्स देने वालों में 27 होटल, 10 रेस्तरां, 42 बैंक, 45 पीजी हाउसिस, 20 औद्योगिक इकाइयां भी शामिल हैं। ऐसा पाया गया है कि भवन मालिकों ने अपने सैट 30 से 40 हजार रुपए प्रतिमाह के किराए पर चढ़ाए हैं। इसके बावजूद कंजरवेंसी टैक्स के तौर पर कुछ भी नहीं दे रहे। इतना ही नहीं शहर के कई लोग अपने घर में ही नियमों के खिलाफ पीजी चला रहे हैं। टैक्स देना तो दूर यह भवन मालिक पानी बिजली भी डोमेस्टिक यूज कर रहे हैं।