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साहब! सफेद मशरूम का बीज खरीदा था, उग गए भूरे

7 वर्ष पहले
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^गलती से दो तरह के कल्चर में मिक्सिंग हो गई। इससे कुछ लोगों को दूसरा बीज चला गया। महिलाओं को यूनिवर्सिटी 100 बैग कंपोस्ट देने को तैयार हैं। दुर्व्यवहार और धमकाने जैसी कोई बात नहीं हुई है। अगर िफर भी एेसा हुअा होगा तो मामले की जांच करके पत लगाया जाएगा िक चूक कहां पर हुई। -डॉ.विजय सिंह ठाकुर, वीसीनौणी यूनिवर्सिटी

एसोसिएशन ने की नुकसान के मुअावजे की मांग

मशरूम के भूरे उगने पर स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने िशकायत पत्र भी लिखा।

मशरूम ग्रोवर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष रतन ठाकुर, सचिव अमर जयसवाल, कोषाध्यक्ष लक्ष्मी ठाकुर सदस्य संजय ठाकुर ने कहा कि मामला सामने आने पर इस बारे में एक पत्र यूनिवर्सिटी के वीसी को लिखा गया, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अलबत्ता, महिलाओं के साथ अधिकारियों ने दुर्व्यवहार किया। उन्होंने कहा कि प्रभावितों को लागत, समय और मैटीरियल के हिसाब से मुआवजा दिया जाए।

धमकाया भी

महिलाओंने कहा कि पांच दिसंबर को उन्हें यूनिवर्सिटी में बुलाया गया और वहां तीन अधिकारियों ने कहा कि इस बात का क्यों ढिंढोरा पीट रही हो और 100 बैग ले जाओ। महिलाओं का आरोप है कि उनमें से एक अधिकारी ने उन्हें धमकाया।

सोलन के बसाल में उगे भूरे मशरूम। इनकी मार्केट वैल्यू होने से िकसानों को नुकसान हुअा है।

सोलन शहर के साथ लगते बसाल गांव में शक्ति किसान क्लब उज्ज्वल स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं आशा देवी, प्रवीणा, कुसुमलता कुसुम ने बताया कि वे 2010 से मशरूम उत्पादन का काम कर रहे हैं। इसके लिए लोन लिया है। इस बार 7 अक्टूबर को उन्होंने चंबाघाट लैब से व्हाइट बटन मशरूम का बीज लिया। इसे आशा देवी के फार्म में लगाया। जब मशरूम निकला तो उसका रंग सफेद की जगह भूरा था। उन्हें इसके बारे में जानकारी नहीं थी। जानकारों ने बताया कि यह भूरा मशरूम है जो विदेशों में उगाया जाता है। यहां की मार्केट में इसकी डिमांड नहीं है। इससे उनका हजारों रुपए का नुकसान हो गया है।

पवन ठाकुर| सोलन

किसान-बागबानोंको उन्नत खेती के गुर सिखाने की जिम्मेदारी संभालने वाली यशवंत सिंह परमार बागवानी वानिकी यूनिवर्सिटी का एक और कारनामा सामने आया है। स्वयं सहायता समूह की सदस्य महिलाओं ने चंबाघाट स्थित यूनिवर्सिटी रिसर्च लैब से व्हाइट बटन मशरूम का बीज खरीदा लेकिन जब दो माह बाद मशरूम निकला तो उसका भूरा रंग दे