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सात साल से अटकी सीवरेज योजना

7 वर्ष पहले
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ठियोगनगर के लिए सात साल पूर्व शुरू हुई सीवरेज योजना का निर्माण कार्य सात सालों के बाद भी अधूरा पड़ा है। लगातार विकसित होते ठियोग कस्बे में इस कारण साफ-सफाई व्यवस्था में सुधार नहीं हो पाया है। कभी विभाग की सुस्ती और कभी भूमि संबंधी अड़चनों में फंसी इस योजना में कई साल पहले सीवरेज पाइपें बिछाने सहित कई कार्य हो चुके हैं, लेकिन ट्रीटमेंट प्लांट बन पाने के कारण यह योजना अधूरी पड़ी है।

हुआथा उद‌्घाटन

ठियोगकस्बे में सीवरेज बिछाने के कार्य का उद‌्घाटन 2008 में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने किया था। चार करोड़ की लागत से बनने वाली इस योजना से नगर के सभी क्षेत्रों को सीवरेज से जोड़ा जाना था, लेकिन सात सालों में इसका कछुआ गति से निर्माण चलता रहा और नगर के कुछ हिस्से में सीवरेज पाइपें बिछाने का कार्य ही हो पाया। इस कार्य के लिए मंगवाई गई पाईपें कुछ बिछाई गईं और बाकी की कई सालों से सरोग रोड में पड़ी हैं।

जो कार्य हुआ वह भी अब क्षतिग्रस्त हो चुका है। एनएच और शालीबाजार में बिछाई गई पाईपें ओर चैंबर टूट चुके हैं और उसपर टारिंग और टाईलें बिछ चुकी हैं।

लोगोंको असुविधा

ठियोगकस्बे का विस्तार पिछले कुछ सालों में कई गुना बढ़ा है लेकिन कस्बे में सीवरेज होने के कारण लोगों की परेशानी दिनोंदिन बढ़ रही है। सार्वजनिक शौचालयों के सेप्टिक टैंक आए दिन भर जाने से गंदगी फैलती है। कस्बे में सैकड़ों भवन आए दिन बन रहे हैं।

^रहीघाट के पास बन रहे ट्रीटमेंंट के मामले में नप के पार्षदों के अलावा सभी पक्षों से बात की गई है लेकिन लोग अभी भी टैंक के बनने देने पर राजी नहीं हैं जिसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है। राजेन्द्रखाबला, सहायकअभियंता, आईपीएच विभाग

इस योजना में अब तक लगभग आधा धन पैसा हो चुका है। इस योजना में डेढ़ करोड़ की लागत से ट्रीटमेंट बनाने का कार्य इस वर्ष रहीघाट के पास शुरू किया गया था। कुछ कार्य हो भी चुका था लेकिन पंचायत और बन रहे प्लांट के साथ के गांवों के निवासियों के विरोध के कारण यह कार्य बंद हो गया है। इसके चलते इस योजना के बनने पर एक बार फिर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। ग्रामीण कह रहे हैं कि यहां पर टैंक बनने से उनके पेयजल स्त्रोत दूषित हो जाएंगे। लोग उनकी चरांद में मलबा फेंके जाने से नाराज हैं। इसे लेकर ग्रामीण निर्माण स्थल पर अधिकारियों के समक्ष प्रदर्शन भी कर चुके