गर्मियों में हो सकती है पानी की कमी
ठियोग| सर्दियोंमें कम बर्फबारी और बारिश के कारण ठियोग क्षेत्र में पानी के स्त्रोत रिचार्ज नहीं हो पाए हैं यदि आने वाले दिनों में भी बारिश और बर्फबारी हुई तो इसका असर आने वाले गर्मियों में क्षेत्र में पेयजल योजनाओं पर पड़ सकता है। ठियोग क्षेत्र में 80 प्रतिशत गांवों को खड्डों से उठाऊ पेयजल योजनाओं के जरिए पीने के पानी की सप्लाई होती है यदि सर्दियों में ऊंचाई वाले इलाकों में पर्याप्त बर्फ पड़े तो गर्मियों के मौसम में इन खड्डों में पानी का स्तर घट जाता है। आजकल ठियोग की सभी प्रमुख खड्डों और नालों में पानी का स्तर कम हो गया है। सर्दियों में इन खड्डों और नालों के लिए ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फ कम पड़ने के कारण पानी नहीं मिला है। ठियोग क्षेत्र में 14 दिसंबर को एक फुट के आसपास बर्फ गिरी थी उसके बाद तीन बार दो से तीन इंच बर्फ गिरी है जो इन जल स्रोतों के जलस्तर को बढ़ाने के लिए पर्याप्त नहीं है।
अधिकतर गांव ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बसे हैं जिनके आसपास छोटे मोटी बावडिय़ां और ना लू आदि भी पेयजल के काम आते हैं इन स्रोतों की निर्भरता भी बर्फबारी और बारिश पर ही है।ठियोग क्षेत्र में ग्रामीण क्षेत्रों में लगे हजारों हैंडपंपो को भी सर्दियों की बर्फ से ही जीवन मिलता है।
इनखड्डों से आता पेयजल
सैंजक्यारा, माहोरी, क्यार, क्यारटू, मझार, धमांदरी, कढरब, गलु खुर्द, चिखड़, बलोआ, बांदरू, छोगा आदि बड़ी और इसके आसपास की छोटी खड्डों पर बनी उठाऊ पेयजल योजनाओं के जरिए ठियोग की अधिकतर पंचायतों को पेयजल मिलता है। सर्दियों और बरसात में पर्याप्त बर्फबारी और बारिश नहीं होती है तो क्षेत्र में पीने के पानी का संकट हो जाता है।
^अभी तक सभी योजनाएं सामान्य चल रही हैं लेकिन यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश और बर्फ पड़ी तो गर्मियों के मौसम में कुछ परेशानी सकती है। राजेंद्रकुमार, सहायक अभियंता, सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग