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परगना गवाई में देवता का शांद समारोह

5 वर्ष पहले
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देव पंरपरा में कहा जाता है अधीवा

शामको देवता की विशेष पूजा जिसे देव पंरपरा में अधीवा कहा जाता है की गई। सुबह देवता का पाची पूजन हुआ। देवता नए बने देवरे में विराजमान रहे। इस आयोजन में देवी जैस, देवी हलाई मझोली, देवता जनोग ,देवता महोग आदि देवठियों से भी कारदार पहुंचे थे। मंगलवार को नए देवरे की प्रतिष्ठा का कार्यक्रम हुआ। इस देवरे को चंडी पाठ अन्य देव पुजाओं से प्रतिष्ठित किया गया। देवरे की प्रतिष्ठा के बाद देव भोज का आयोजन किया गया। देवता के पुजारी दिवाकर शर्मा के अनुसार गवाई में यह स्थान देवी कनाग का है और यहां पर ठौड़, खोड़ू देवता भी विराजमान हैं।

सिटी रिपोर्टर|ठियोग

देवता चिखड़ेश्वर में अधीन आने वाले परगना गवाई में दो दिवसीय देव उत्सव शांद का आयोजन श्रद्धा देव पंरपरा के अनुसार आयोजित किया गया। देव कार्यक्रम में दोनों दिन पांच हजार से अधिक लोगों ने भाग लिया। शांद का आयोजन परगना में देवता के देवरे के सैंकड़ों साल पुराने देवरे के जीर्णोद्धार के बाद इसकी प्रतिष्ठा के लिए किया गया था।

हजारों कलैणों ने किया देवता का स्वागत

देवता यहां पर चिखड़ स्थित अपनी देवठी से सोमवार शाम पंहुचे थे। पूरे परगना गवाई के हजारों कलैणों ने देवता का स्वागत किया। देवता के साथ देव प्रमुख मोहनलाल झराईक,गुर कलीराम शर्मा, वजीर राकेश शर्मा, देवता कमेटी प्रधान सीआर शर्मा, सचिव रोशनलाल, भंडारी मोहनसिंह, देव पुरोहित दिवाकर शर्मा, राजन शर्मा,ब्रह्मदेव शर्मा, सहित सभी कारदार गवाई पहुंचे। आधा किलोमीटर पहले देवता की अगवानी की गई। इस देवरे का गवाई में देवी के कार्यों के लिए इस देवरे का इस्तेमाल किया जाता है। जबकि जब देवता ग्राम परिक्रमा में आते हैं तो वे इस परगने में तय अपने स्थान पर ठहरते हैं। परगना गवाई में देवता चिखड़ेश्वर में 300 से अधिक परिवार हैं जो देवता के कलैणें हैं। देवता चिखड़ेश्वर महाराज इस शांद से मंगलवार देर शाम अपनी देवठी में लौट आए।

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