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US में नौकरी करता था ये इंजीनियर, देश लौटकर जानवरों की कर रहा सेवा / US में नौकरी करता था ये इंजीनियर, देश लौटकर जानवरों की कर रहा सेवा

bhaskar news

Jul 18, 2016, 07:38 AM IST

धर्मशाला शहर से करीब 13 किमी दूर है धनोटू गांव। इस गांव के रोबिन सिंह यूएसए में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी करते थे। रोबिन डेढ़ साल पहले यूएसए से गांव लौटे। पहले से ही पशु प्रेमी थे।

अमेरिका से लौट कर जानवरों की कर रहे सेवा। अमेरिका से लौट कर जानवरों की कर रहे सेवा।
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शिमला. हिमाचल के धर्मशाला से करीब 13 किमी दूर है धनोटू गांव। इस गांव के रोबिन सिंह यूएसए में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी करते थे। रोबिन डेढ़ साल पहले यूएसए से गांव लौटे। पहले से ही पशु प्रेमी थे। वतन वापसी के बाद गाय और स्ट्रीट डॉग्स की हो रही बेकद्री ने इन्हें परेशान करके रख दिया। गांव में बड़ा घर बना रहे थे। घर में स्वीमिंग पुल भी बनाना चाहते थे, लेकिन अब स्वीमिंग पुल का इरादा छोड़ कर काउ शेड बनवाया। यहां वो गाय समेत अनेक बीमार जानवरों की सेवा करते हैं। सड़क से घर लाते हैं डॉगी...
- बता दें कि सड़क पर बीमार डॉग्स को भी रोबिन अपने घर लाते हैं।
- वो काउ शेड में उसे रखकर इलाज करते हैं। पूरी तरह से ठीक हो जाने पर ही डॉग को छोड़ते हैं।
- साथ ही, सड़कों पर खड़ी बीमार गायों को भी अपने घर लेकर आते हैं।
- रोबिन घायल पशुओं का नि: शुल्क इलाज करते हैं। उनके घर में अब 12 लावारिस गायें और 8 स्ट्रीट डॉग्स हो गए हैं।
- वे कहते हैं कि वो बीमार पशुओं को तब तक अपने शेड में रखते हैं। जब तक वह पूरी तरह से ठीक हो जाए।
घर का नाम रखा बदमाश पीपल फार्म
- रोबिन के मुताबिक अमेरिका से लौटने के बाद वह एक अच्छा घर बनाना चाहते थे।
- ऐसा घर जिसमें स्वीमिंग पुल समेत अनेक मॉडर्न फैसिलिटी हो।
- सड़कों के किनारे खडे़ बीमार पशुओं को देखा तो फिर स्वीमिंग पुल बनाने का इरादा त्याग दिया।
- स्वीमिंग पुल के जगह और बजट में एक काउ शेड बना दिया।
- वो कहते हैं कि अपने घर को बदमाश पीपल फार्म नाम दिया है।
- पूरे क्षेत्र में इसे पीपल फार्म के नाम से जाना जाता है।
- पीपल फार्म के गाय, बैल, कुत्ते, गधे और घोड़े जैसे जानवरों का एकदम फ्री इलाज किया जाता है।
गोबर के गमले भी बना रहा रहा है पीपल फार्म
- जानवरों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने और रेवन्यू जनरेट के लिए अब पीपल फार्म ने गोबर के गमले बनाने शुरू किए हैं।
- ये गोबर के गमले पर्यावरण के लिए बिल्कुल भी नुकसानदेह नहीं है।
- साथ ही इनमें पौधे रखने से पौधों की रूट खराब नहीं होती और पौधों को गमले सहित ही मिट्टी में लगाया जा सकता है।
- रोबिन ने इन गमलों को बेचने के लिए नर्सरियों और संस्थाओं के साथ संपर्क किए हैं और साथ ही गांव वालों को 15 रुपए में गमले बेच रहे हैं।
- गमले बनाने के लिए एक मशीन तैयार की गई है जिसमें 2 मिनट में गमला तैयार किया जाता है।
आगे की स्लाइड्स में देखें जानवरों की सेवा करते रोबिन की फोटोज...

सड़क से बीमार जानवरों को लेकर आते हैं घर। सड़क से बीमार जानवरों को लेकर आते हैं घर।
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बीमार डॉग्स को भी रोबिन अपने घर लाते हैं। बीमार डॉग्स को भी रोबिन अपने घर लाते हैं।
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धनोटू गांव में गाय के साथ रोबिन। धनोटू गांव में गाय के साथ रोबिन।
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इंडिया आकर बनाना चाहते थे मॉडर्न घर। इंडिया आकर बनाना चाहते थे मॉडर्न घर।
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घर का नाम रखा बदमाश पीपल फार्म। घर का नाम रखा बदमाश पीपल फार्म।
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रोबिन को पूरे इलाके में जानवरों से प्यार के लिए जाना जाता है। रोबिन को पूरे इलाके में जानवरों से प्यार के लिए जाना जाता है।
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अमेरिका से लौट कर जानवरों की कर रहे सेवा।अमेरिका से लौट कर जानवरों की कर रहे सेवा।
सड़क से बीमार जानवरों को लेकर आते हैं घर।सड़क से बीमार जानवरों को लेकर आते हैं घर।
बीमार डॉग्स को भी रोबिन अपने घर लाते हैं।बीमार डॉग्स को भी रोबिन अपने घर लाते हैं।
धनोटू गांव में गाय के साथ रोबिन।धनोटू गांव में गाय के साथ रोबिन।
इंडिया आकर बनाना चाहते थे मॉडर्न घर।इंडिया आकर बनाना चाहते थे मॉडर्न घर।
घर का नाम रखा बदमाश पीपल फार्म।घर का नाम रखा बदमाश पीपल फार्म।
रोबिन को पूरे इलाके में जानवरों से प्यार के लिए जाना जाता है।रोबिन को पूरे इलाके में जानवरों से प्यार के लिए जाना जाता है।
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