अवाहदेवी। 108 वसंत देख चुकी पुरोजू देवी अभी भी बुढ़ापे को मात दे रही है। पुरोजू देवी पत्नी स्व. थोला राम सरौन कस्बे के चलैहली गांव की स्थाई निवासी हैं। इतनी उम्र बीतने पर वह लाठी के सहारे खूब चलती फिरती हैं और अभी भी अपनी दिनचर्या के काम स्वयं करती हैं।
उसके पति थोला राम का 35 वर्ष पहले निधन हो गया था। पुरोजू की कोई संतान नहीं है, फिर भी अपनी आयु के इस लंबे सफर में वह सामूहिक परिवार की चार पुश्तें निहार चुकी है। वह बताती हैं कि वह अपनी आयु के 101 वर्ष तक हर साल अपना जन्म दिन मनाती आई हैं। अभी उनकी यादश्त भी बहुत तेज है। पुरोजू के पास बैठने पर वह पुरानी यादें सबसे सांझा करती हैं। उनकी आंखों की रोशनी व सुनने की क्षमता भी बिल्कुल ठीक है।
नहीं मिलती कोई भी पेंशन: पुरोजू ने बताया कि वह अपने भतीजे प्रेम सिंह व धर्मचंद शास्त्री के घर पर जीवन निर्वाहन कर रही है, जो उसकी खूब सेवा करते हैं। उसका मलाल है कि उसकी 108 वर्ष उम्र बीत चुकी है, मगर उसे न तो बुढ़ापा पेंशन मिल रही है और न ही विधवा पेंशन। उसे प्रशासन से इस बात को लेकर मलाल है।
जड़ी-बूटियों से खुद ही कर लेती हैं अपना उपचार
पुरोजू बताती हैं कि उसने अपने जीवन में कभी दवाइयाें का सेवन नहीं किया। छोटी-मोटी बीमारी लगने पर वह सिर्फ बाम औैर देसी जड़ी बूटियों का लेप लगाकर अपना उपचार स्वयं करती हैं और इसे ही अपनी सेहत का राज बताती हैं। वह सरौन के लौहकू राम की पुत्री हैं। बताती हैं कि उसके तीन भाई और 5 बहने थीं, जिन सभी का निधन हो गया है।