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रैगिंग मामले के दोषी 28 स्टूडेंट्स एनआईटी के लौटे संस्थान, हॉस्टल में ही रहेंगे

7 वर्ष पहले
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हमीरपुर। स्थानीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) में रैगिंग के मामले में दोषी पाए गए सभी स्टूडेंट्स की सस्पेंशन बहाल कर दी गई है। ये स्टूडेंट्स करीब एक माह बाद फिर संस्थान लौट आए हैं और इन्हें पहले की तरह हॉस्टल उपलब्ध करवाया गया है। कक्षाओं में जाना भी इनका शुरू हो गया है। इनकी बहाली होने से न केवल स्टूडेंटस ने बड़ी राहत ली है बल्कि सबसे बड़ी परेशानी इनके अभिभावकों की थी जो संस्थान प्रशासन से लगातार संपर्क में थे और यहां प्रशासन से मिलकर वे सस्पेंशन की बहाली के लिए कई बार आग्रह कर चुके थे। उधर संस्थान प्रशासन का कहना है कि इनकी बहाली से संबंधित छात्रों को अपने किए का एहसास भी हुआ है और बाकियों के लिए सबक।

गौरतलब है कि अगस्त माह में संस्थान में 28 स्टूडेंटस को रैगिंग का दोषी पाया था। जिनमें 7 लड़कियां और 21 लड़के शामिल थे। मामला संस्थान की एंटी रैगिंग कमेटी के पास गया था और उसी की सिफारिश के आधार पर यह कार्रवाई की गई थी। सूत्रों के मुताबिक घटना बीती 4 अगस्त की थी। जिस पर एक अभिभावक ने संज्ञान लेते हुए संस्थान को इस बावत बताया था और तत्काल कमेटी गठित कर संस्थान ने दोषी पाए गए स्टूडेंटस को संस्थान से निकाल दिया था।
अपने स्तर पर की कार्रवाई

एनआईटी प्रशासन ने सभी स्टूडेंट्स को सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइंस के मुताबिक रैगिंग के दायरे में ही पाया था और फौरी तौर पर यह कार्रवाई अमल में लाई थी। हालांकि इस बावत मामला पुलिस के सुपूर्द नहीं हुआ था और अपने स्तर पर की गई कार्रवाई को अंजाम देकर स्टूडेंटस को एहसास करवाया है।

सभी के हित में लिया फैसला

उधर चीफ वार्डन अशोक कुमार का कहना है कि सस्पेंशन बीते रोज ही रिबोक की गई है। यह फैसला संस्थान ने सभी के हित में लिया है। स्टूडेंटस अब बीते रोज से हॉस्टल ज्वाइन कर गए हैं और उनका कक्षाओं में जाना भी शुरू हो गया है। उधर रजिस्ट्रार डॉ.एके सिंघा से जब यह पूछा गया कि करीब एक माह संस्थान से बाहर रखे गए इन स्टूडेंटस की अटेंडेंस अब कैसे पूरी होगी, उन्होंने कहा कि सब कुछ नियमों के तहत ही होगा।