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38 साल से भूमि नाम करवाने के लिए धक्के खा रहे दलित परिवार

7 वर्ष पहले
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भूमिहीनोंको राज्य सरकार ने जमीन तो दे दी, लेकिन अभी तक भूमि का मालिक नहीं बनाया है। पिछले 38 साल से सिरमौर जिला के संगड़ाह अौर शिलाई ब्लॉक कई परिवार सरकार आैर प्रशासन के कार्यालयों में धक्के खा रहे हैं, लेकिन इनके नाम भूमि नहीं कर रहे हैं। आलम यह है कि इन्हें आवंटित जमीन के स्थान पर प्रशासन दूसरी ही जमीन दिखाई जाती है। अब परेशान होकर पीपलस एक्शन फोर पीपल इन नीड अंधेरी के माध्यम से मीडिया में आकर सरकार और प्रशासन पर आराेप लगाए हैं। संगड़ाह तहसील के रणकुआ गांव के लायक राम, जास्वी गांव के बस्ती राम, शिलाई तहसील के खड़ेच गावं से सीता राम ने कहा कि वर्ष 1976 में सरकार ने भूमिहीनों को जमीन दी थी। इस दौरान पांच बीघा का पट्टा दिया गया था।

दलित परिवारों से संबंध रखने वालों को आज दिन तक यह भूमि नाम नहीं की गई है। लोगाें का आरोप है कि जब अपनी भूमि की तकसीम कराने के लिए गए तो पता चला कि जहां पर वह 38 वर्षाें से रह रहे हैं वो जमीन उनके नाम ही नहीं है। विभाग ने किसी दूसरी भूमि के नंबर को उनके नाम पर चढ़ा रखा है। लाना गांव के दलित सहीराम ने आरोप लगाया है कि एक रसूकदार व्यक्ति ने धोखाधड़ी करने का अाराेप लगाया है। सहीराम ने कहा कि उसके पिता ने वर्ष 1972 में कब्जा बहाली का कानून बना इस दौरान रसूकदार व्यक्ति की भूमी पर हम कई वर्षों से रह रहे थे। इसके बदले में पिता ने उसे पैसे इक्टठा कर दे दिए थे, लेकिन उसके बाद भी भूमी हमारे नाम नहीं की। दलित रवि कुमार ने कहा कि दलित वर्ग के लोगों की सभी राजनितिक पार्टियाें की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि अनदेखी के मामलों को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग समक्ष उठाएगें।