सरकार को लोन का सहारा
हिमाचलसरकारके वित्तीय प्रबंधन को लेकर वित्त विभाग के लिए सितंबर का महीना सकून भरा रहा। राज्य सरकार को सितंबर में खर्च पूरा करने के लिए ऋण नहीं लेना पड़ा। चालू महीने में सरकार को एसजेवीएनएल से 100 करोड़ रुपए की राशि इक्विटी शेयर के रूप में मिल गई थी।
इसके साथ ही विश्व बैंक से भी राज्य सरकार को 550 करोड़ रुपए की राशि मिलने की उम्मीद बंधी है। पिछले महीने भी राज्य सरकार को केंद्र सरकार ने मांग के अनुरूप लोन लेने की अनुमति देकर झटका दिया था। राज्य सरकार ने अगस्त में केंद्र सरकार से 200 करोड़ रुपए के ऋण की डिमांड भेजी थी, इसमें से केंद्र ने राज्य को 150 करोड़ रुपए के ऋण लेने की स्वीकृति दी गई थी। सितंबर महीने के बिना ऋण के निकालने के बाद अब राज्य सरकार ने अक्टूबर में दोबारा से ऋण लेने के लिए मामला केंद्र के पास मंजूरी के लिए भेजने का फैसला लिया है। प्रदेश में मौजूदा स्थित ये है कि वित्तीय वर्ष में विकास के लिए रखे 100 रुपए के मुकाबले विकास कार्य के लिए सिर्फ 34.78 रुपए ही मिल रहे हैं।
प्रधान सचिव वित्त डॉ. श्रीकांत बाल्दी ने माना कि राज्य सरकार अक्टूबर महीने में ऋण लेगी। सितंबर महीने में सरकार ने ऋण नहीं लिया है।
35 हजार करोड़ से ज्यादा का कर्ज
हिमाचलसरकार पर 35 हजार करोड़ से ज्यादा का कर्ज है। राज्य में अब तक रही भाजपा-कांग्रेस की सरकारों के समय में कर्ज की राशि बढ़ती रही है। प्रदेश में पिछले कुछ सालों से ऋण का अधिक बोझ पड़ने का एक प्रमुख कारण 13वें वित्तायोग का गलत आकलन बताया जाता है। इसके कारण प्रदेश को 10,725 करोड़ रुपए कम मिले हैं। इसी तरह केंद्र सरकार ने लंबे समय से प्रदेश को उदार वित्तीय मदद भी नहीं दी है।