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रोहड़ू अस्पताल में सुविधाएं कम

7 वर्ष पहले
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स्टाफ नर्सों के 7, मैटर्न का एक पद खाली

150बिस्तरोंके अस्पताल में मुश्किल से 120 बैड ही लग पाए हैं। पैरा मेडिकल विभाग में भी स्टाफ नर्सों के 7, मैटर्न का एक, लैब टैक्निशियन का 1 पद खाली है। यहां तैनात चिकित्सकों के लिए आवासीय सुविधा उपलब्ध नहीं हैं। जबकि आवासों के निर्माण के लिए जगह और 40 लाख रुपए की राशि उपलब्ध है। सड़क हादसों की दृष्टि से अति संवेदनशील क्षेत्र होने के बावजूद अस्पताल में ट्राॅमा सेंटर की सुविधा भी नहीं है।

भास्कर न्यूज | रोहडू

अपरशिमलाके सबसे बड़े क्षेत्र और दुर्गम क्षेत्रों को स्वास्थ्य सुविधाएंं प्रदान करने वाला रोहडू सिविल अस्पताल बुनियादी सुविधाओं अभाव में स्वयं बीमार हो रहा है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के रोहडू दौरे से क्षेत्रवासियों को अस्पताल को अर्बन हेल्थ सेंटर का दर्जा मिलने की उम्मीद है।

अर्बनहेल्थ सेंटर बनाएं

विषमभौगोलिक पिरिस्थितियों वाले इस क्षेत्र में सिविल अस्पताल रोहडू पर एक लाख से अधिक लोग स्वास्थ्य सेवाओं के लिए निर्भर हैं। छौहारा, टिक्कर, जुब्ब्ल कोटखाई, नेरवा, डोडरा-क्वार सहित उत्तराखंड के लोग भी इसी अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं ले रहे हैं। सर्दियों में बर्फबारी के चलते सड़कों के बंद होने और वर्तमान समय में रोहडू शिमला सड़क की खस्ताहालत को देखते हुए अस्पताल को अर्बन हेल्थ सेंटर का दर्जा दिए जाने की मांग जोर पकड़ रही है।

हरमाह 15 हजार ओपीडी

सिविलअस्पताल रोहडू में हर माह करीब 12 हजार से 15 हजार ओपीडी होती है। इसके अलावा हर माह अस्पताल में दाखिल होने वाले मरीजों की संख्या 2 हजार से अधिक है। आपताकालीन परीस्थिित में अस्पताल में आने वाले मरीजों की सख्या 1500 से अधिक रहती है। अस्पताल में हर माह 100 से अधिक जन्म लेते हैं। अस्पताल में इतने अिधक मरीज आने के वाबजूद इस अस्पताल में सुविधाओं की कमी नजर रही है।

चिकित्सकोंके पद खाली

सिविलअस्पताल रोहडू में ब्लड बैंक की सुविधा है लेेकिन सर्जन का पद खाली पड़ा हाेने के कारण मरीजों को पेरशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा हड्डी रोग, मेडिसन और ईएनटी विशेषज्ञ के पद खाली पडे़ हैं। जबकि रेडियोलोजिस्ट का एक महीने में ही स्थानांतरण हो गया। एनिस्थिसिया विशेषज्ञ ने यहां ज्वाइन करने के बाद छुट्टी ले रखी है। इससे मरीज परेशान हैं।