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जनजातीय क्षेत्रों में 6 महीने में सुविधाएं दें सरकार : हाईकोर्ट

7 वर्ष पहले
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हाईकोर्टनेकेंद्र राज्य सरकार को आदेश दिए है कि वह छह महीने में जनजातीय क्षेत्रों के निवासियों को पर्याप्त सुविधाएं मुहैया करवाएं। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर ने जनहित में दायर याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि दोनों सरकारें कानून के मुताबिक दूरदराज के क्षेत्रों को सुविधाएं देने के लिए कारगर कदम उठाएं।

संगनम पंचायत के पूर्व प्रधान लोवसांग टंडूप कूंगरी पंचायत के प्रधान छेरिंग थाेपगा ने मीडिया के सामने चाइना चलो के नारे लगाए थे। इन्हें देशद्रोह के मामले में गिरफ्तार भी किया गया था। कोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी किए बिना ही जनहित में दोनों सरकारों को आदेश दिए कि छह महीनों में सभी दूरवर्ती स्थानों पर रहने वाले लोगों को आवश्यक सुविधाएं देने के लिए कारगर कदम उठाए।

किन्नौर जिला के पूह निवासी संजय कुमार ने याचिका के माध्यम से कोर्ट को बताया था कि लाहौल स्पीति के एक पंचायत प्रधान पूर्व प्रधान ने सरकारों के उदासिन रवैये के कारण चाइना की मदद मांगें जाने के नारे लगाए थे। यह सरकारों की लापरवाही के पूर्ण रवैए का ही नतीजा है कि सीमा पर रह रहे लोग इस तरह के नारे लगाने को मजबूर हुए हैं। समाचार पत्रों में छपी खबरों के माध्यम से कोर्ट को बताया गया कि पिन वैली के 13 गांव को जोड़ने वाला पुल जून 2012 में किरी नदी में आई बाढ़ से टूट गया था। दो साल बीत जाने और नदी में फिर से बाढ़ के अाने के खतरे के कारण सरकार को कई बार इस समस्या से अवगत करवाया गया था, लेकिन समस्या हल नहीं हुई।