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विवि अधिनियम 1970 में संशोधन का विरोध

7 वर्ष पहले
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हिमाचलप्रदेश विश्वविद्यालय कर्मचारी समन्वय समिति ने सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम-1970 में संशोधन करने का विरोध किया है। समिति का कहना है कि ऐसा कोेई संशोधन पारित किया जाए, जिससे संस्थान की गरिमा और ईसी द्वारा लिए गए फैसलों को ठेस पहुंचे और भविष्य में संस्थान हित कर्मचारियों के हितों को कोेई नुकसान हो।

अध्यक्षने कहा

समितिके अध्यक्ष हितेश्वर ठाकुर का कहना है कि ईसी में सरकार की ओर से हरीश जनार्था, वर्तमान सीपीएस इंद्र दत्त लखनपाल, वर्तमान विधायक बंबर ठाकुर चंद्रशेखर विवि के कानून नियमों से भली भांति परिचित हैं। ऐसे में एक्ट की धारा 21 और 28 में संशोधन करना संस्थान के हित में नहीं होगा। उनका कहना है कि वित्त समिति में भी कार्यकारिणी परिषद सदस्य हरीश जनार्था पहले से ही सदस्य के रूप में मौजूद हैं और जो भी फैसले कार्यकारिणी परिषद वित्त समिति द्वारा सर्वसम्मति से कर्मचारियों संस्थान हित में लिए जाते हैं, उसमें सरकार की भी भूमिका होती है।

ईसीकी है अहम भूमिका

समितिका कहना है कि उच्च संस्थान में शिक्षा का स्तर ऊंचा करने के लिए कार्यकारिणी परिषद की अहम भूमिका रहती है। ऐसे में विशेष शिक्षा सचिव या अतिरिक्त शिक्षा सचिव स्तर से नीचे के अधिकारी को प्रतिनिधित्व करने के लिए भेजा जाए। समिति का कहना है कि कर्मचारियों के हितों को सुरक्षित रखना सरकार और संस्थान का दायित्व बनता है और वह कर्मचारियों के हितों को सुरक्षित रखने में कोई कमी नहीं रहने देंगे। बहरहाल समिति ने तर्क दिया है की इस अधििनयम में संशाेधन से कर्मचारियों के हितों को नुकसान होगा।