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सरकार गेहूं की जगह दे सकती है आटा

7 वर्ष पहले
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राज्यसरकारप्रदेश में बीपीएल राशनकार्ड धारकों को गेहूं की जगह आटा देने पर विचार कर रही है। आटा देने से पहले सरकार लोगों से उनकी राय जानेगी कि वह क्या चाहते हैं। आटा देने पर सरकार लोगों से पिसाई के दाम वसूलेगी। लोग अगर ये कीमत देने को तैयार हैं तो गेहूं की जगह आटा दिया जाएगा।

आटे के लिए लोगों से एक से ढेड रुपए अतिरिक्त वसूला जाएगा। सरकार यऐ राशि गेहूं की पिसाई पर आने वाले खर्चे की वसूली जाएगी। अगर लोग आटे के लिए अतिरिक्त पैसा देने को तैयार हो जाते हैं तो सरकार प्रदेश में लोगों को गेहूं की जगह आटा उपलब्ध करवाएगी। इसके बाद लोगों को गेहूं की पिसाई के झंझट से छुटकारा मिल जाएगा। सरकार ग्राम सभा की बैठकों के माध्यम से उनकी राय जानेगी की वे पीडीएस के तहत दिए जाने वाले राशन में गेहूं की जगह आटा लेना चाहते हैं या नहीं।

तीनलाख बीपीएल

प्रदेशमें इस समय तीन लाख बीपीएल राशनकार्ड धारक हैं। इन्हें सरकार डिपुओं के माध्यम से तीन रुपए किलो की दर से बीस किलो गेहूं प्रदान कर रही है। इसे बाद में लोगों को पिसाई के लिए या तो चक्की पर ले जाना पड़ता है या मिल में जाकर उसकी पिसाई करवानी पड़ती है। जो उनके लिए महंगा सौदा साबित हो रहा है। गेहूं को पहले डिपो से लाना फिर उन्हें पिसवाने के लिए ले जाना लोगों के लिए मुश्किल भरा काम हो रहा है। इससे निजात दिलवाने के लिए सरकार बीपीएल कार्डधारकों को गेहूं की जगह आटा देने पर विचार कर रही है। प्रदेश में चक्कियों की भी लोगों को कमी खल रही है। पिसाई के लिए लोगों को चक्कियां नहीं मिल रही हंै और जो चक्कियां हैं भी वह लोगों के घर से काफी दूरी पर हैं जहां पे आने जाने के लिए लोगों को पूरा दिन लग जाता है। सरकार प्रदेश में एपीएल राशनकार्ड धारकों को आटा दे रही है। यह आटा 6 रुपए की दर से उपलब्ध करवाया जाता है। सरकार का दावा है कि बीपीएल को अगर सरकार आटा देती है तो यह एपीएल की दर से कम कीमत पर ही उपलब्ध करवाया जाएगा।

पिसाई की कीमत लेंगे

^सरकारप्रदेश में बीपीएल को गेहूं की जगह आटा देने पर विचार कर रही है। लेकिन इसकी एवज में उनसे पिसाई कि कीमत वसूली जाएगी। लोग क्या चाहते हैं पहले उनसे उनकी राय जानी जाएगी। जीएसबाली, खाद्यएवं आपूर्ति मंत्री