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\"हर जिला में चार दिन लगेगी महिला आयोग की अदालत\'

7 वर्ष पहले
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पतिको प|ी और प|ी को पति के प्रति बफादार रहना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। महिला आयोग की अध्यक्ष का कहना है अगर दोनों एक दूसरे के प्रति ईमानदार रहे तो ऐसी नौबत नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि आज पति-प|ी एक दूसरे के आगे झुकने को तैयार नहीं है। इसके लिए आपस में तालमेल का होना बहुत जरूरी है। आयोग की अध्यक्ष जैनब चंदेल का कहना है कि महिलाएं खुद ही शिकायत करती हैं। उनके पति अदालत पहुंच जाते हैं पर महिलाएं नहीं पहुंचती हैं। ऐसी महिलाओं को न्याय कहां से मिलेगा। इसलिए शिकायतकर्ता खुद अवश्य पहुंचे। प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष जैनब चंदेल का कहना है कि अब हर डिस्ट्रीक में चार दिन की अदालत लगाई जाएगी।

घरद्वारमिलेगा न्याय

इससेजो महिलाएं शिमला नहीं पहुंच पाती है उन्हें उनके जिले में ही घरद्वार न्याय दिलाया जाएगा। वहीं शिमला प्रदेश आयोग की अदालत में भी चार दिन अदालत लगाई जाएगी। यह निर्णय इसलिए लिया गया कि जल्दी -जल्दी महिलाओं को न्याय दिला सके। प्रदेश महिला आयोग की अदालत में दिसंबर महीने में 91 मामले सुनवाई के लिए रखे गए थे। इसमें शिमला, सोलन, मंडी, कुल्लु, कांगड़ा जिले के इस मामले में 42 अनुपस्थित रहे, जबकि 49 उपस्थित रहे। इसके अलावा नौ का समझौता करवाया गया।

लिव इन रिलेशनशिप का एक मामला आया, जिसमें लड़का-लड़की दोनों ही ऑफिस में साथ काम करते हैं। लड़का हिमाचल और लड़की अन्य राज्य की है। कुछ समय तक सब ठीक चलता रहा, लेकिन बाद में लड़का शादी से मुकर गया। इसमे लड़की ने आयोग की अदालत में गुहार लगाई। इस पर आयोग की अदालत ने उन्हें कुछ समय सोचने के लिए दिया है।

एक अन्य मामले में पति-प|ी डेढ़ साल से अलग रह रहे थे। मामले के अनुसार पति घर में खेतीबाड़ी करता है, जबकि प|ी नौकरी करती है। पति की जिद्द थी कि वह नौकरी छोड़ दे। प|ी ने मना किया कि वह नौकरी नहीं छोड़ेगी। दोनों का एक बच्चा भी है। आयोग की अदालत में दोनों हाजिर हुए। पहले तो पति नौकरी को छुड़ाने के चक्कर में उलझा रहा। इसके बाद आयोग के अध्यक्ष जैनब के समझाने पर कि आज के समय में नौकरी नहीं मिलती है। इसलिए प|ी प्रतिदिन घर से नौकरी के लिए जाएगी। अपने घर का काम काज भी संभालेगी। इस पर प|ी और दोनों ही मान गए।

सोलन जिला के इस मामले में पति-प|ी साथ रहते हंै पर पति प|ी को खर्चा नहीं देता है। इस पर प|ी ने आयोग की अद