70% डेविएशन के केस हो सकते हैं रद्द
अवैधनिर्माण के मामलों में निगम कोर्ट के चक्कर काटने वाले भवन मालिकों को भी जल्द ही राहत मिल सकेगी। अवैध निर्माण के मामलों में आयुक्त कोर्ट में चले सभी केस यदि 70 प्रतिशत डेविएशन के अंदर अाते हैं तो ऐसे सभी केस कोर्ट में रद्द हो जाएंगे। नगर निगम के आयुक्त कोर्ट में इस वक्त 360 के करीब अवैध निर्माण के केस चले हैं। इन सभी मामलों की सुनवाई निगम कोर्ट की ओर से दी गई तिथि में हर सप्ताह होती है। इस बार भी शुक्रवार को आयुक्त कोर्ट में 54 मामलों में सुनवाई हुई। भवन मालिकों को केस की सुनवाई के लिए कोर्ट के कई कई बार चक्कर काटने पड़ते हैं और जब कोर्ट की ओर से फैसला सूना भी दिया जाता है तो भी भवन मालिक कोर्ट के फैसले के खिलाफ जिला न्यायालय या फिर हाईकोर्ट तक का दरवाजा खटखटाते हैं। रिटेंशन पॉलिसी के आने से ये भवन मालिक भी अपने भवन के अवैध हिस्से को रेग्युलर करवाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। अवैध निर्माण के मामले में फंसे भवन मालिक रिटेंशन पालिसी में भवन रेगुलर करवाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए इन्हें भी अन्य भवन मालिकों की तरह सभी जरूरी दस्तावेज 45 दिनों के भीतर जमा करवाने होंगे। इसके बाद एक वर्ष तक चलने वाली प्रक्रिया में यदि इन भवनों के अवैध हिस्से को 70 फीसदी डेविएशन के दायरे में पाया जाता है तो इन्हें रेगुलर कर दिया जाएगा।
इसके बाद एपी ब्रांच की ओर से ऐसे भवन मालिकों को नो आब्जेक्शन सर्टिफिकेट दिया जाएगा। इस सर्टिफिकेट को इन्हें निगम कोर्ट में दिखाना होगा और इसके बाद अवैध निर्माण का केस रद्द होगा।
^ निगम कोर्ट में चले अवैध निर्माण के चले केस यदि रिटेंशन के दायरे में आते हैं तो उन्हें प्रक्रिया पूरी होने के बाद रद्द कर दिया जाएगा। इसके लिए उन्हें पूरी प्रक्रिया से गुजरने के बाद ही रद्द किया जाएगा। अमरजीतसिंह, नगरनिगम आयुक्त
अवैध निर्माण के केस ड्राॅप हो जाने से निगम कर्मचारियों और निगम आयुक्त का सप्ताह में एक दिन काम करने के लिए बचेगा। वर्तमान में निगम कोर्ट का आयोजन हर सप्ताह किया जाता है। जिसमें 40 से 60 मामलों की सुनवाई की जाती है। इसके अलावा केस को तैयार करने वाले जेई, सर्वेयर अौर आर्किटेक्ट प्लानर को भी अवैध निर्माण के मामलों में कार्रवाई करनी पड़ती है।