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मातृ-शिशु अस्पताल के लिए सरकार से मिली हरी झंडी
जोनलअस्पतालमंडी में मातृ-शिशु अस्पताल के लिए सरकार ने सभी औपचारिकताएं पूरी करते हुए निर्माण कार्य को हरी झंडी दे दी है। 20 करोड़ की लागत से बनने वाले इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए स्वास्थ्य विभाग ने लगभग 5 करोड़ की राशि जमा करवाकर टेंडर प्रक्रिया शुरू करवा दी है। मातृ-शिशु अस्पताल प्रदेश भर में तीन जिलाें शिमला में आईजीएमसी, धर्मशाला में डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज मंडी के जोनल अस्पताल में बनने प्रस्तावित है। जननी सुरक्षा शिशु मृत्यु दर कम करने के लक्ष्य को निर्धारित कर मातृ-शिशु अस्पताल बनाए जा रहे हैं। प्रदेश में मंडी जोनल अस्पताल ने पहल करते हुए इसका निर्माण कार्य शुरू करने की दिशा में कार्य आरंभ कर दिया है।
गायनीवार्ड में सिर्फ 60 ही बेड : मंडीके जोनल अस्पताल में इस अस्पताल के बनने से अन्य जिलों की गर्भवती महिलाओं को भी आईजीएमसी पीजीआई जाने से छुटकारा मिलेगा। मौजूदा समय में जोनल अस्पताल में गायनी वार्ड में मात्र 60 बैड की व्यवस्था है, जोकि पर्याप्त नहीं हैं। क्षेत्रीय अस्पताल में महीने में लगभग 400 से 500 डिलीवरी करवाई जाती है। गायनी वार्ड अस्पताल के पुराने ग्राउंड फ्लोर ओटी सातवीं मंजिल में हैं। जिसमें गर्भवती महिलाओं को एमरजेंसी में ओटी तक पहुंचाने में काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। अस्पताल में नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट की सुविधा होने से नवजात शिशुओं को किसी तरह की कमी होने पर आईजीएमसी या पीजीआई रैफर करना पड़ता है। अस्पताल के बनने से गर्भवती महिलाओं को सभी परेशानियों से छुटकारा मिलेगा।
आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे
गर्भवतीमहिलाओं नवजात शिशुओं को बेहतर स्वास्थ्य चिकित्सा प्रदान करने के उद्देश्य से बनाए जा रहे यह अस्पताल आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगा। गर्भवती महिलाओं को एक ही छत के नीचे सभी तरह की सुविधाएं मिलेंगी। इस अस्पताल में ऑपरेशन थिएटर, डिलीवरी रूम, ओपीडी अन्य व्यवस्थाएं एक दूसरे से अटैच होंगी। इसका निर्माण जोनल अस्पताल परिसर में ही किया जाएगा।
मातृ-शिशु अस्पताल के निर्माण के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा औपचारिकताएं पूरी कर ली गई है। निर्माण कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। डॉ.देशराज शर्मा, सीएमओजोनल अस्पताल मंडी।
मातृ-शिशु अस्पताल निर्माण कार्य शीघ्र करने के लिए बजट का प्रावधान कर दिया गया है। यह टोटल प्रोजेक्ट लगभग 20 करोड़ की लागत से