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शहनाई और गायकी की दिखी जुगलबंदी

7 वर्ष पहले
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गेयटी थियेटर में क्लासिकल म्यूजिक फेस्टीवल के दौरान प्रस्तुति देते जावेद मजहर अली खान साथ में दया शंकर।

भास्कर न्यूज |शिमला

रागयमन पर आधारित बंदिश ‘पीया तोरे नयना प्यारे लागे.....’ से प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीत गायक उस्ताद जावेद और उस्ताद मज़हर अली खान ने अपनी गायकी और पंडित दया शंकर के शहनाई वादन की जुगलबंदी ने शिमला शास्त्रीय संगीत उत्सव की दूसरी संध्या पर वीरवार को गेयटी थियेटर में उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। कार्यक्रम में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डा. कर्नल धनी राम शांडिल बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर उत्सव की दूसरी संध्या का शुभारंभ किया। इस मौके पर डा. कर्नल धनी राम शांडिल ने कार्यक्रम की सराहना की इससे पूर्व, अतिरिक्त मुख्य सचिव, भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग उपमा चौधरी ने मुख्यतिथि को सम्मानित किया। इस अवसर पर पदम भूषण उस्ताद बड़े गुलाम अली खान के पोते उस्ताद मज़हर अली खान राग यमन पर आधारित बंदिश ‘पीया तोरे नयना प्यारे लागे और उस्ताद ज्वाद अली खान ने गायिकी और पंडित दया शंकर, अश्वनी शंकर और योगेश शंकर ने शहनाई की जुगलबन्दी से समां बांध दिया।भाषा संस्कृति विभाग के निदेशक अरूण शर्मा सहित अन्य गणमान्य भी इस मौके पर मौजूद रहे। पंजाबी अकादमी दिल्ली, भाषा एवं संस्कृति विभाग, पर्यटन विभाग के तत्वावधान में समर कैपिटल के 150 वर्ष पूरे होने के कार्यक्रमों की श्रृंखला में गेयटी में क्लासिकल म्यूजिकल फेस्टीवल मनाया।