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मुख्य चुनाव आयुक्त सहित केंद्र सरकार को दिया नोटिस

7 वर्ष पहले
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हाईकोर्टने कांगड़ा के विधायक पवन काजल की सदस्यता को रद्द करने की गुहार को लेकर दायर याचिका में राज्य सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने के आदेश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश धर्मचंद चौधरी की खंडपीठ ने आरटीआई कार्यकर्ता अश्वनी गुप्ता द्वारा दायर याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के बाद ये आदेश दिए। प्रार्थी के अनुसार पवन काजल असल में सरकारी ठेकेदार के तौर पर काम कर रहा था। जब विधानसभा के चुनाव के लिए उसने नामांकन पत्र भरा था तो उस समय वह बतौर ठेकेदार राज्य सरकार से कई बड़े प्रोजेक्ट का ठेका लिए था। इसमें विधानसभा परिसर धर्मशाला, पॉलिटेक्निक कॉलेज आदि कई प्रोजेक्ट शामिल थे। प्रार्थी ने दलील दी है कि रिप्रेजेंटेशन ऑफ पिपुल एक्ट के प्रावधानों के अनुसार वह इस स्थिति में चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं रखता है।

उसने अपने सरकार से इस कार्य के आउटस्टेंडिंग ड्यूज बाबत झूठा शपथ पत्र चुनाव आयोग के समक्ष पेश किया, जोकि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस तरह के मामलों में सुनाए फैसलों के विपरीत है। प्रार्थी ने रिट ऑफ को-वारंटी से हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। प्रतिवादी पवन काजल जो आजाद प्रत्याशी के तौर पर चुनाव जीत चुका है कि विस सदस्यता रद्द करने की गुहार लगाई है। प्रार्थी की दलील ये भी है कि क्योंकि पवन काजल का चुनाव अवैध है उसके गैर कानूनी तरीके से सरकारी दफ्तर पर कब्जा जमा कर रखा है तथा उसे विधानसभा सदस्यता से निष्कासित किया जाना चाहिए।