कंपनी को 40 करोड़ का जुर्माना
111मेगावाट की सावड़ा कुड्डू प्रोजेक्ट के टनल निर्माण में देरी करने वाली कंपनी के खिलाफ पावर कॉरपोरेशन ने सख्त कार्रवाई की है। कंपनी पर पहले 40 करोड़ का जुर्माना लगाया गया। अब कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज करने की तैयारी है। ठेकेदार को निष्कासित कर कंपनी के साथ किए करार को रद्द कर दिया गया है। इस कार्रवाई पर तर्क दिया गया है कि अनुबंध की शर्तों के अनुसार कार्य की प्रगति होने के चलते यह कार्रवाई की गई है। टनल निर्माण के लिए दिए टेंडर की शर्तों के तहत कंपनी से बैंक गारंटी ली गई थी। बैंक गारंटी से 40 करोड़ की राशि को वसूला गया है।
85 फीसदी ही कार्य किया कंपनी को वर्ष 2007 में टनल निर्माण का कार्य मिला था। करार के तहत कंपनी को 11190 मीटर खुदाई का कार्य करना था। कंपनी 9548 मीटर यानि 85 फीसदी ही कार्य कर पाई। पावर कारपोरेशन कंपनी को निर्माण के लिए तय शर्तों के अनुसार पेमेंट करती रही। बावजूद इसके कंपनी ने कार्य में सुस्त रवैया अपनाए रखा। इस का खामियाजा राज्य सरकार को भुगतना पड़ा है। निर्माण कार्य में देरी के चलते परियोजना शुरू होने में 5 साल देरी हुई है।
टेंडरमें रखी थी शर्त
पावरकॉरपोरेशन ने टेंडर डॉक्यूमेंट में टनल निर्माण के कार्य के लिए शर्तें निर्धारित की थी। इन शर्तों में यदि कंपनी निर्माण कार्य में देरी या अनियमितता बरतती है तो बैंक में जमा करवाई गई सिक्योरिटी मनी को कॉरपोरेशन जब्त कर लेगा। कंपनी ने करार के तहत कार्य नहीं किया। जिसके चलते कारपोरेशन ने दो चरणों में मैं. केसी ज्वाइंट वेंचर कंपनी की बैंक में जमा 40 करोड़ की सिक्योरिटी को जब्त कर लिया है। पहले चरण में 16 करोड़ दूसरे चरण में 24 करोड़ की राशि जब्त किया गया।
नुकसानतो फिर भी हुआ
पावरकॉरपोरेशन ने भले ही कंपनी की बैंक सिक्योरिटी को जब्त किया करार रद्द किया। बावजूद इसके भी सरकार निगम को नुकसान हुआ है। परियोजना में पांच साल की देरी हुई। परियोजना की लागत 50 फीसदी बढ़ गई। पहले यह कार्य 115 करोड़ में पूरा हो जाना था। दूसरी बार टेंडर करने पर 179 करोड़ में यह टेंडर दिया गया।
नई कंपनी के टेंडर में जोडे़ गए थे नए काम
हिमाचलपावर कारपोरेशन का कहना है कि नई कंपनी को टनल निर्माण के कार्य के अलावा नए काम भी सौंपे गए थे। यह काम 179 करोड़ रुपए में सौंपा गया। नए करार में ठेकेदार को 530 मीटर लंबी स्टील लाइनिंग, 85 फीसदी कंकरीट लाइनिंग, 100 फिसदी इनवर्ट लाइनिंग और एक गेट का कार्य दिया गया है। कंपनी का कहना है कि काम को नए सिरे में देने से 8 से 9 फीसदी अौसत मुद्रास्फीती में बढोतरी हुई है। नई कंपनी को नए करार के मुताबिक कार्य दिया गया है। उपमहाप्रबंधक ने कहा कि कारपोशन ने अनुबंधित राशि में समझौते के दौरान 30 करोड़ न्यूनतम बोलीदाता से कम करवाया था। पूर्व ठेकेदार को कार्य में तेजी का समय दिया, ठेकेदार कार्य पूरा नहीं किया। ठेकेदार ने हाईकोर्ट में निगम के खिलाफ याचिका दायर की
^कंपनी के साथ करार को रद्द कर दिया गया है। 40 करोड़ की पेनल्टी लगाई गई है। अनुबंध की शर्तों के अनुसार कार्य करने को लेकर मामला दर्ज करवाया जाएगा। डीकेशर्मा, एमडी पावर कॉरपोरेशन