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जो कमेटी फैसला देगी वह हम मानेंगे

7 वर्ष पहले
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फीसवृद्धि पर छात्र संगठनों के आंदोलन के आगे जहां सरकार ने घुटने ठेक दिए है, वहीं विवि प्रशासन भी बैकफुट पर अा गया है। अब एचपीयू प्रशासन ने तर्क दिया है कि सरकार की ओर गठित की गई कमेटी यदि फीस बढ़ोतरी को कम करने को कहती है तो वह इसे स्वीकार कर लेंगे।

इस बारे में एकता मंच का कहना है कि हम पूर्ण फीस वापसी के लिए आंदोलन कर रहे हैं। कसाथ ही यदि कमेटी का फैसला फीस बढ़ोतरी पर यथावत लागू रहता है तो वह इसे भी मानेंगे। इससे पहले एचपीयू प्रशासन ने फीस को कम करने से साफ इनकार कर दिया था। कुलपति प्रो.एडीएन वाजपेयी का कहना है कि वह प्रदेश के मुख्यमंत्री का समिति गठित करने के लिए विशेष रुप से आभार व्यक्त करते हैं। कमेटी की अोर से उन्हें जो भी आदेश दिए जाएंगे उसे वह स्वीकार करेंगे।

प्रशासनभी रखेगा पक्ष

सरकारकी अोर से गठित कमेटी के सामने एचपीयू प्रशासन भी अपना पक्ष रखेगा। प्रशासन की अोर से कमेटी को बताया जाएगा कि अन्य राज्यों और प्रदेश शिक्षा बोर्ड की अपेक्षा एचपीयू की फीस दरें कम है। ऐसे में एक बार फीस बढ़ोतरी करनी जरूरी थी। छात्रों को अच्छा शैक्षणिक सुविधाएं देने के लिए इसे बढ़ाया जाना जरूरी हो गया था। कुलपति का कहना है कि समिति सारे पक्षों को सुनकर एवं सारे पहलुओं पर विचार करने के उपरांत जो भी निर्णय देगी, उसे विश्वविद्यालय पूरी तरह से स्वीकार करेगा।

सरकार की अोर से पूर्व सेवानिवृत जज की अध्यक्षता में गठित की गई कमेटी में छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों की राय भी ली जाएगी। छात्र संगठन पिछले काफी समय से कह रहे है कि सरकारी संस्थान में इतनी अधिक मात्रा में फीस नहीं बढ़नी चाहिए। एनएसयूआई की विश्वविद्यालय इकाई ने मुख्यमंत्री द्वारा फीस वृद्धि के आकलन पर गठित की गई कमेटी के गठन पर आभार जताया है। संगठन के परिसर अध्यक्ष हुकम सिंह हुक्की और महासचिव सोहन पुंडीर ने कहा कि जब तक फीस वृद्धि का फैसला आम छात्र समुदाय के हक में नहीं आता है तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।