10 अंकों से पिछड़ रहे प्रशिक्षित
सरकार से की पॉलिसी में संशोधन की मांग
बेरोजगारशिक्षक संघ के सदस्यों मंडी से संदीप, रविंद्र, कांता संतोष, हमीरपुर से सतीश, रणजीत आरती, बिलासपुर से बाबूराम, कमलेश, वंदना, रमेश, सुरेश, सुषमा अनुराधा तथा शिमला से पूनम विजय आदि का कहना है कि पीरियड आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति के लिए बनाई गई पॉलिसी में लोकल उम्मीदवारों को 10 अतिरिक्त नंबरों की व्यवस्था उनके लिए एक बड़ी रुकावट बन गई है। टेट क्वालीफाई करने के बावजूद वे लोकल उम्मीदवारों से मेरिट में पिछड़ रहे हैं। उनमें से कइयों की पंचायत या पटवार सर्कल में शिक्षकों के पद खाली नहीं हैं। ऐसे में वे कहां जाएं। संविधान में सभी को एक समान अवसर देने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने सरकार से पॉलिसी में संशोधन की मांग की है।
भास्कर न्यूज|बिलासपुर
स्कूलोंमें पीरियड के आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति के लिए बनाई गई पॉलिसी पर बेरोजगार अध्यापकों ने आपत्ति जताई है। प्रशिक्षित बेरोजगार शिक्षकों का कहना है कि पॉलिसी में स्थानीय पंचायत या पटवार सर्कल के उम्मीदवार को 10 अतिरिक्त नंबर देने की व्यवस्था की गई है, जो सरासर गलत है। इससे टेट क्वालीफाइड अभ्यर्थी पिछड़ रहे हैं। यह संवैधानिक व्यवस्था के भी विपरीत है। प्रदेश सरकार ने स्कूलों में जेबीटी, सीएंडवी, टीजीटी पीजीटी आदि के रिक्त पदों पर पीरियड आधार पर नियुक्ति की पॉलिसी बनाई है। इसमें लोकल पंचायत या पटवार सर्कल के उम्मीदवार को 10 अतिरिक्त नंबर देने की व्यवस्था की गई है। इससे अन्य पंचायतों या पटवार सर्कलों से ताल्लुक रखने वाले प्रशिक्षित बेरोजगार पिछड़ रहे हैं। इनमें से कई ऐसे हैं, जिन्होंने टेट भी क्वालीफाई किया है। इसके बावजूद लोकल पंचायतों पटवार सर्कलों के ऐसे अभ्यर्थी भी मेरिट में उनसे आगे निकल रहे हैं, जिन्होंने टेट क्वालीफाई नहीं किया है। कई पंचायतें, पटवार सर्कल और तहसीलें ऐसी भी हैं, जिनके अंतर्गत आने वाले स्कूलों में शिक्षकों की कमी नहीं है। उन्हें दूसरे स्थानों पर अप्लाई करना पड़ रहा है, जहां लोकल उम्मीदवार 10 अतिरिक्त नंबरों के बूते उन्हें पीछे छोड़ रहे हैं।