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तीन अतिक्रमणकारी दोषी

7 वर्ष पहले
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वन अधिनियम 33 के तहत थे केस दर्ज

दसबीघा से अधिक वन भूमि पर अतिक्रमण के इन तीनों मामलों में अतिक्रमणकारियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 447 वन अधिनियम 33 के तहत मामले दर्ज हुए थे। वर्ष 2012 13 में न्यायालय ने इन मामलों में निशानदेही करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद चल रही छानबीन के बाद न्यायालय ने 26 सितंबर 2014 को इन तीनों मामलों में चारों अतिक्रमणकारयों को दोषी माना है। िनयम के अनुसार इससे उन्हें सजा के साथ‌- साथ जुर्माने का भी प्रावधान है।

करोड़ों कमाने वालों में हड़कंप

न्यायालयके इस फैसले से वन भूमि पर सेब के बागीचे लगा कर करोड़ों रुपए कमा चुके अतिक्रमणकािरयों में हड़कंप मच गया है। अप्पर शिमला के जुब्बल, खड़ापत्थर, देआरीघाट, चुंजर, छाजपुर रोहडू के खदराला, बशूणी, सुंगरी, मर्डी, सहित छौहार क्षेत्र में हजारों बीघा भूमि पर सेब के अवैध बागीचे लगाए गए हैं। जिससे अतिक्रमणकारी हर साल लाखों रुपए की कमाई कर रहे हैं। न्यायालय का यह फैसला आने के बाद अतिक्रमणकारियों की नींदंे उड़ गई हैं।

भास्कर न्यूज| राेहडू

सेब के बागीचों के लिए व्यापक स्तर पर वन भूमि पर हुए अवैध कब्जों के खिलाफ न्यायालय ने कड़ा संज्ञान लेते हुए तीन अतिक्रमणकारियों को अवैध कब्जे का दोषी करार दिया है। न्यायालय ने अतिक्रमणकािरयों को कब्जों को छोड़ने का निर्देश देते हुए वन भूमि से कब्जे हटाने के बाद शपथ पत्र देने को कहा है।

सेब के बागीचों के लिए कब्जाई गई वन भूमि के मामले में न्यायालय का यह पहला बड़ा फैसला है। सिविल जज जुब्बल धीरू भागीरथ ठाकुर ने 26 सितंबर को सेब के बागीचाें के लिए वन भूमि पर अवैध कब्जे के तीन मामलों में अतिक्रमणकारियों को दोषी करार दिया है। जुब्बल वन परिक्षेत्र के तहत आने वाले इन मामलों में कठासु निवासी बंसीलाल, जाचली निवासी धर्म सिंह, खड़ापत्थर निवासी कंवर सिंह बहादुर सिंह को वन भूमि पर अतिक्रमण कर सेब के बागीचे लगाने का दोषी पाया गया है। जिला सहायक न्यायवादी भैरव नेगी ने इन तीनों मामलों की पैरवी की। न्यायालय ने अतिक्रमणकारियों को वन भूमि पर लगाए गए सेब के बागीचों काे खाली करने के बाद न्यायालय में इसका हल्फनामा जमा करने के निर्देश दिए हैं।

विभागसौंपेगा हल्फनामा

इतनाही नहीं तीनों मामलों में वन विभाग को भी अतिक्रमणकारियों द्वारा कब्जा छोड़ने के बाद वन भूमि को अपने कब्जे में लेने का