उत्सव में रघुनाथ के आने पर संशय
बलिप्रथा को लेकर हाईकोर्ट ने अपने फैसले को बरकरार रखा है जबकि दूसरी तरफ देव संसद ने अपने पुराने रिवाज को अपनाए रखने की बात कही है। ऐसे में अब देश समाज के लोग धर्म संकट में पड़ गए हैं दशहरा फैसले के बाद अब दशहरा उत्सव में भवान रघुनाथ आएंगे या नहीं इसको लेकर हालांकि देव समाज ने फैसला नहीं लिया है लेकिन इस मसले पर भगवान रघुनाथ के छड़ीबरदार ने भी कुछ कहने से परहेज किया है और वे शिमला के लिए रवाना हो गए हैं। कारदार संघ के अध्यक्ष ने कहा है कि वे अपनी लड़ाई को सुप्रीम कोर्ट तक लेकर जाएंगे। लेकिन दशहरा उत्सव के आयोजन को अब एक सप्ताह भी नहीं बच पाया है लेकिन बलि प्रथा को लेकर असमंजस बना हुआ है। देव समाज अब देवताओं का आदेश माने या फिर माननीय अदालत का वे दोराहे पर खडे़ हैं।
परंपरा के अनुसार 3 अक्टूबर से शुरू होने वाले सात दिवसीय कुल्लू दशहरे में अंतिम दिन 9 अक्तूबर को लंका दहन के दिन अष्टांग बलियां देने की प्रथा है और इस प्रथा के बिना दशहरा की रथ यात्रा विधान से पूरी नहीं होती। लिहाजा, ऐसे में बलि प्रथा पर प्रतिबंध के बाद दशहरे में रघुनाथ भगवान के शामिल होने पर संशय नजर रहा है।
अब प्रशासन और देव समाज में टकराब की स्थिति बन सकती है। क्योंकि देवता के कारकून अपनी परंपरा को निभाने की कोशिश करेंगे तो वहीं प्रशासन को माननीय अदालत का फैसला लागू करने के लिए देव समाज पर दवाब बनाना पडे़गा। हालांकि कारदार संघ ने भी इस फैसले पर पुन: विचार याचिका दायर करने का निर्णय लिया है।