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सिरमौर में खुमली प्रथा के विरोध में आगे अाए दलित
सिरमौरजिला की 229 पंचायतों में चल रही खुमली प्रथा को दलित संस्थान के प्रतिनिधियों ने बंद करने की सरकार से मांग उठाई है। बाबा साहेब अंबेडकर वेलफेयर सोसायटी, संत श्री रविदास धर्मसभा, अखिल भारी कोली समाज ने मिलकर गत 25 सितंबर को खुमली प्रथा के विरोध में राज्यपाल, सीएम आला अधिकारियों को उपायुक्त शिमला के माध्यम से ज्ञापन भेजा। यह जानकारी तीनों संस्थानों के प्रतिनिधियों ने रविवार को शिमला में पत्रकार वार्ता में दी। बाबा साहेब अंबेडकर वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष प्रीतपाल सिंह ने कहा कि खुमली प्रथा से सिरमौर में दलित समाज पर अत्याचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सिरमौर जिला की जानकी देवी उसके परिवार पर खुमली प्रथा के कारण काफी अत्याचार हुआ है। जानकी की 20 वर्षीय बेटी के साथ गांव के कुछ युवकों ने दुराचार किया। जबकि उसने इसकी शिकायत पुलिस में करनी चाही तो खुमली पंचायत के माध्यम से उन्हें गांव से बाहर कर दिया गया। पिछले एक सप्ताह से जानकी देवी का परिवार शिमला के गुरूद्वारे में रह रहे हैं।
229 पंचायतों में खुमली प्रथा प्रचलित है। खुमली प्रथा हरियाणा की खाप की तरह होती है। इन पंचायतों में कोई भी निर्णय खुमली पंचायत ही लेती है। अत्याचार के खिलाफ पुलिस में जाने के लिए भी खुमली से ही पूछना पड़ता है। खुमली बुलाने के लिए संबंधित व्यक्ति को 20 हजार रुपए नकद, एक बकरा दो-तीन गांव को खाना खिलाना पड़ता है। यदि कोई व्यक्ति ऐसा करें तो उसकी सभी सार्वजनिक सुविधाएं पूरी तरह से बंद कर दी जाती हैं। पुलिस भी इन क्षेत्रों की रिपोर्ट लिखने में खुमली के प्रतिनिधियों से ही परमिशन लेती है। यदि मनाही हो तो पुलिस कार्रवाई नहीं करती।