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थलौट हादसा: परिजनों ने सबूतों से छेड़छाड़ की जताई आशंका

7 वर्ष पहले
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हाईकोर्टनेथलौट हादसे से जुड़े मामले में दोनों पक्षों से आग्रह किया कि वे कोर्ट को ऐसे उपाय सुझाएं ताकि ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति से बचा जा सके। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद इस हादसे में मारे गए छात्रों के परिजनों को पार्टी बनने की इजाजत दे दी।

मृतक छात्रों के अभिभावकों का आरोप है कि सरकार इस घटना को गंभीरता से नहीं ले रही है। उन्हें हादसे के सबूतों से छेड़छाड़ की पूरी आशंका है। मुख्य सचिव ने अपने हल्फनामे में आशंका जाहिर की है कि 19 जून को बरामद किया गया शव छात्र कुलूरी श्रीहर्षा का हो सकता है। न्यायालय ने इस स्थिति को स्पष्ट करने के लिए प्रतिवादियों को चार सप्ताह का समय दिया है।

हादसेरोकने के िलए क्या किया

एसपीमंडी ने भी इस मामले में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर कोर्ट को बताया कि इस मामले में दर्ज एफआईआर के संदर्भ में जांच पूरी कर ली गई है। 9 सितंबर को न्यायिक दंडाधिकारी मंडी के समक्ष चालान पेश कर दिया गया है। चालान में मुख्य सचिव को आदेश देते हुए कहा कि वह सभी संबंधित अधिकारियों के साथ मीटिंग कर कोर्ट को हलफनामे के माध्यम से बताए कि सरकार ने ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं। मुआवजे और हादसे की पुनरावृत्ति रोकने के उपायों को लेकर इस मामले की सुनवाई 17 नवंबर को होगी।

19 जूनको बरामद शव को फैकल्टी सदस्यों ने एम शिवा प्रकाश वर्मा का शव समझ कर उसके परिजनों को सौंप दिया था। 13 जुलाई को बरामद एक अन्य शव की पहचान हैदराबाद की फॉरेंसिक लेबोरेटरी ने एम शिवा प्रकाश वर्मा के तौर पर की थी।

आरोप: मृतकों की िशनाख्त में लापरवाही बरती

परिजनों नेमुख्य सचिव के हल्फनामे का हवाला देते हुए कोर्ट को बताया कि मृतकों की शिनाख्त में भी लापरवाही बरती गई। 19 जून को ब्यास नदी से निकाले गए छात्र के शव की पहचान करने वाले कॉलेज के फैकल्टी सदस्यों को प्रतिवादी बनाने की मांग भी कोर्ट से की गई थी।