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नेरवा 150 किमी दूर, नहीं जाएगी \"102\'

7 वर्ष पहले
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राजधानीमेंसरकारी अस्पतालों में दूरदराज से डिलवरी करवाने आने वाली महिलाओं के लिए 102 एंबुलेंस जी का जंजाल बन गई है। 102 एंबुलेंस वाले मनमानी कर रहे हैं और विभाग और ही रिपन अस्पताल उन पर कार्रवाई कर पा रहा है। रिपन अस्पताल से 102 एंबुलेंस वाले ने इसलिए जाने से मना कर दिया क्योंिक नेरवा 150 किलोमीटर से अधिक दूर है। रिपन अस्पताल में अभी तक ऐसी तीन घटनाएं हो चुकी हैं।

दीन दयाल अस्पताल में प्रसूता महिला सपना को शुक्रवार को सुबह साढ़े नौ बजे से पहले छुट्टी हुई। तो उनके पति हरिराम ने 102 एबुलेंस को फोन किया कि हमें नेरवा जाना है। उनसे पूछा गया कि नेरवा कितना किलोमीटर है। इस पर उसने कहा कि लगभग 150 किलोमीटर दूर है। इस पर उसे जवाब मिला कि हम 150 किलोमीटर दूर नहीं जा सकते है। हमें केवल 100 किलोमीटर और 110 किलोमीटर तक जा सकते हैं। आप अपना इंतजाम खुद करें। इसके बाद उन्होंने फिर डेढ़ घंटे बाद फोन किया कि हमें भेज दो। मैं गरीब आदमी हूं मेरे पास इतने पैसे नहीं कि प्राइवेट गाड़ी करके जाऊं। इस पर 102 एबुलेंस ने जाने से इनकार किया।

एंबुलेंसमिलने पर मायूसी हाथ लगी

प्रसूतामहिला सपना ने कहा कि अस्पताल से छुट्टी सुबह हो गई थी, अब इसी सोच में डूबी थी कि पति के पास जो पैसे थे वह सब खत्म हो गए हैं। एबुलेंस मिलने ंके बाद अब घर जाने के लिए बस का किराया भी नहीं है। अब नेरवा गांव चैड़ी में कैसे पहुंचेगी। गरीब परिवार से संबंध रखने वाली महिला सपना कि दो दिन पहले डिलीवरी हुई थी। लेकिन बेटे के जन्म होते ही बेटा नहीं रहा। क्योंकि बच्चा कमजोर पैदा हुआ था। इससे पहले एक बेटा है। अब चिंता सता रही है अपने घर कैसे पहुंचेगी। वहीं तीन दिन से दीन दयाल अस्पताल में इस तरह की दिक्कतें रही हैं। शिमला राजधानी में इस तरह से 102 एबुलेंस आनाकानी कर रही है तो अन्य जिलों में क्या हो रहा है।

एंबुलेंस मिलने पर डीडीयू अस्पताल में ही रहने को मजबूर है महिला।

^102 एंबुलेंस की सेवा गर्भवती महिलाओं के लिए शुरू की गई है। इसमें एंबुलेंस को लंबी दूरी जाने में दिक्कत महसूस हो रही है। उनकी छोटी-मोटी प्रॉब्लम को सुलझाया जाएगा लेकिन इसमें कोई भी किलोमीटर फिक्स नहीं किया गया है। 102 एबुलेंस को शिमला जिले के कोने में गर्भवती और नवजात शिशुओं को छोड़ने के लिए जाना पड़ेगा। हंसराज शर्मा, एमडीनेशनल हेल्थ मिशन

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