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चालान काट सकते, बस जब्त कर सकते

6 वर्ष पहले
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एचआरटीसी की बस को जब्त करने के मामले में सभी कर्मचारी संगठन एक मंच पर गए हैं। अब कर्मचारी मिलकर पुलिस कर्मियों के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे। यही नहीं सोमवार को पुलिस के डीजीपी को भी शिकायत पत्र सौंपा जाएगा।

हिमाचल पथ कर्मचारी समन्वय समिति का कहना है कि पुलिस के कर्मचारी तो बस को जब्त कर सकते हैं और ही चालान काट सकते हैं। बस को लेकर सिर्फ आरटीओ विभाग ही कार्रवाई कर सकता है। ऐसे में पुलिस कर्मियों ने जो दबंगई दिखाई है, उसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। समिति के सचिव खेमेंद्र गुप्ता का कहना है कि पुलिस कर्मचारियों से जब टिकट मांगा गया, तो उसके बदले में उन्होंने सरकारी बस को ही जब्त कर लिया। ऐसे में पता लगता है कि पुलिस आम लोगों के साथ किस तरह का व्यवहार करती होगी। वर्दी का रौब दिखाकर आम लोगों को डराया धमकाया जाता है। उनका कहना है कि समिति इस मामले को जहां सरकार के सामने उठाएगी, वहीं पुलिस डीजीपी से भी शिकायत की जाएगी।

बसको रोक कर की राजस्व की हानिः भारतीयपरिवहन मजदूर महासंघ का आरोप है कि पुलिस कर्मचारियों ने बस को जब्त कर एचआरटीसी के राजस्व में भी हानि करवाई है। बस को जितनी देर तक रोक कर रखा गया, उससे यात्रियों को भी परेशान किया गया है।

महासंघ के राष्ट्रीय सचिव महेश शर्मा का कहना है कि एसपी शिमला को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए। ताकि ऐसे पुलिस कर्मियों पर तुरंत प्रभाव से कार्रवाई हो। उनका कहना है कि इस मामले में जल्द से जल्द एफआईआर दर्ज होनी चाहिए।

ये था पूरा मामला

बीतेशुक्रवार को शाम करीब 3 बजे एचआरटीसी की बस ढली के लिए चली हुई थी। बस हाउंसिग बोर्ड कॉलोनी भट्टाकुफर के पास पहुंची तो यहां से 14 पुलिस के जवान बस में बैठे। जब कंडक्टर जसवीर ने जवानों से टिकट के पैसे मांगें तो उन्होंने इनकार कर दिया। कंडक्टर ने मामले में आरएम लोकल देवासेन नेगी से फोन पर बात की, उन्होंने भी टिकट लेने को कहा। पुलिस कर्मियों ने टिकट तो ले लिए, लेकिन ढली टनल के पास बस के रुकते ही, बस को ढली थाने ले गए। जहां उसे जब्त कर िलया।