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टेंडर हुए लाखों की मशीनों के, कंपनी थमा गई सस्ती

6 वर्ष पहले
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डेंटल कॉलेज में मशीन की खरीद में लाखों का गोलमाल सामने आया है। अस्पताल की ओर से जिन मशीनों की सप्लाई मंगवाई गई थी, उसकी जगह दूसरे मॉडल की मशीनें कॉलेज को मिली हैं। यह खुलासा उस समय हुआ जब विभागाध्यक्षों ने मशीन रिसीव करने के बाद मॉडल टेंडर के डॉक्यूमेंट का मिलान किया।

डेंटल कॉलेज की ओर से सन-23 ऑटो क्लेव मशीन को मंगवाने के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए थे। टेंडर में एक मशीन की कीमत एक लाख 95 हजार आंकी गई थी। ऐसी 9 मशीनों के टेंडर हुए थे। अब जब कंपनी की ओर से मशीनें कॉलेज में पहुंची तो यह दूसरे मॉडल की पाई गई। विशेषज्ञों के मुताबिक, जिनकी क्वालिटी टेंडर में दी गई शर्तों के मुताबिक काफी निम्न स्तर की है। बाजार में इन दोनों मशीनों की कीमत में भी भारी अंतर है। साथ ही इन मशीनों की कीमत हजारों रुपए में अाती है।

ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर किसने हजारों रुपए की मशीन खरीदने के लिए लाखों रुपए के टेंडर आमंत्रित कर दिए। हालांकि प्रशासन मामला सामने आने के बाद पेमेंट रोकने की बात कह रहा है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि विभागाध्यक्षों की आपत्ति के बावजूद प्रशासन ने दोबारा से रिसिविंग करवाने के लिए स्टोर इंचार्ज को विभागाध्यक्षों के पास क्यों भेजा।

विभागाध्यक्षोंने बचने के लिए वापस ली रिसिविंगः गलतमॉडल की मशीनों का मामला सामने आते ही विभागाध्यक्षों ने इस मामले में फंसने की आशंका को देखते हुए रिसिविंग को वापस ले लिया। इस मामले में अस्पताल प्रशासन की आेर से दोबारा से सादे कागज पर रिसिविंग देने का मामला घोटाले की आशंका जताता है। क्योंकि अस्पताल प्रशासन मामले की गंभीरता को नकारते हुए दोबारा से रिसिविंग देने के लिए क्यों इच्छुक था। इस मसले पर आने वाले दिनों में अस्पताल प्रशासन भी घिर सकता है।

डेंटल कालेज के प्रिंसिपल डॉ आरपी लुथरा ने कहा कि मशीनों को अभी इंस्टॉाल नहीं किया है। इसकी सप्लाई में यदि कोई गलती पाई जाती है तो पेमेंट रोक दी जाएगी। किसी भी सूरत में गलत सप्लाई स्वीकार नहीं की जाएगी। इस पूरे मामले की जांच के बाद ही पता चल पाएगा, जांच की जाएगी।

गलत सप्लाई होगी, पेमेंट रोक दी जाएगी: लुथरा

यह वह मशीन है जो कंपनी डेंटल कॉलेज में थमा गई है।

इस काम अाती है मशीन

डेंटलअस्पताल में चिकित्सकों के औजारों को स्टेरेलाइज (कीटाणु मुक्त) करने के लिए मशीनें लगाई जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य मरीज को दूसरे मरीजों पर इस्तेमाल औजारों से कई फर्क पड़े, इसलिए हर मरीज के इस्तेमाल से पहले औजारों को स्टेरेलाइज किया जाता है।

जो अाप जानना चाहते हैं

डेंटलकालेज ने दिल्ली की एक नामी कंपनी को 9 मशीनें सप्लाई करने का टेंडर दिया है। कंपनी को टेंडर की शर्तों के मुताबिक, सन ऑटोक्लेव 23 मॉडल की मशीनों की सप्लाई देनी थी। इसकी बाजार में कीमत 1 लाख 95 हजार के लगभग है। वहीं अस्पताल को कंपनी ने जो सन ऑटोक्लेव 22 मशीन भेजी है वह करीब 45000 रुपए की है। ऐसे मे इन 9 मशीनों में ही अस्पताल प्रशासन को कंपनी की आेर से 9 लाख से ज्यादा का चूना लगा दिया है।

विभागाध्यक्षों की मदद से सामने आया पूरा मामला

डेंटलकालेज में कंपनी की आेर से ऑटो क्लेव मशीन की सप्लाई भेजी। अस्पताल के विभागाध्यक्षों ने इन मशीनों को रिसीव भी कर लिया। कंपनी की आेर से आए पदाधिकारियों ने मॉडल नंबर में अंतर को मामूली बताकर विभागाध्यक्षों से हस्ताक्षर करवा लिए। इसके बाद कुछ विभागाध्यक्षों ने नेट पर माडल नंबर डालकर कीमत चेक की तो होश उड़ गए। इसमें पाया गया कि जिन मशीनों के टेंडर किए गए थे, वह मशीनें डिलीवर नहीं हुई जबकि कंपनी ने उसकी जगह दूसरे मॉडल की मशीन भेज दी। जिनके रेट में जमीन आसमान का अंतर है। इस मामले में विभागाध्यक्षों ने कंपनी को दी रिसिविंग वापस ले ली। अस्पताल प्रशासन ने इसके बावजूद अगले दिन एक सादे पेपर ही सभी को दोबारा से रिसिविंग लेने के लिए भेजा, लेकिन अधिकतर ने रिसिविंग देने से इनकार कर दिया। इस सादे कागज पर कुछ ने हस्ताक्षर कर दिए हैं।

{डेंटल कॉलेज ने एक कंपनी को सन-23 ऑटो क्लेव मशीन के 9 अॉर्डर िदए थे।

{टेंडर करती बार एक मशीन की कीमत कंपनी ने 1 लाख 95 हजार बताई

{अस्पताल में िडलीवर की गई एक मशीन 45 हजार की बताई जा रही है।