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अब सरकार को लोन का सहारा

7 वर्ष पहले
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हिमाचलसरकारके वित्तीय प्रबंधन को लेकर वित्त विभाग के लिए सितंबर का महीना सकून भरा रहा। राज्य सरकार को सितंबर में खर्च पूरा करने के लिए ऋण नहीं लेना पड़ा। चालू महीने में सरकार को एसजेवीएनएल से 100 करोड़ रुपए की राशि इक्विटी शेयर के रूप में मिल गई थी।

इसके साथ ही विश्व बैंक से भी राज्य सरकार को 550 करोड़ रुपए की राशि मिलने की उम्मीद बंधी है। पिछले महीने भी राज्य सरकार को केंद्र सरकार ने मांग के अनुरूप लोन लेने की अनुमति देकर झटका दिया था। राज्य सरकार ने अगस्त में केंद्र सरकार से 200 करोड़ रुपए के ऋण की डिमांड भेजी थी, इसमें से केंद्र ने राज्य को 150 करोड़ रुपए के ऋण लेने की स्वीकृति दी गई थी। सितंबर महीने के बिना ऋण के निकालने के बाद अब राज्य सरकार ने अक्टूबर में दोबारा से ऋण लेने के लिए मामला केंद्र के पास मंजूरी के लिए भेजने का फैसला लिया है।

प्रधान सचिव वित्त डॉ. श्रीकांत बाल्दी ने माना कि राज्य सरकार अक्टूबर महीने में ऋण लेगी। सितंबर महीने में सरकार ने ऋण नहीं लिया है।

िवकास पर महज 34.78% खर्च

प्रदेश मेंमौजूदा स्थित ये है कि वित्तीय वर्ष में विकास के लिए रखे 100 रुपए के मुकाबले विकास कार्य के लिए सिर्फ 34.78 रुपए ही मिल रहे हैं। वेतन पर 32.38 रुपए, पेंशन पर 14.80 रुपए, ब्याज अदायगी पर 11.64 रुपए और ऋण की अदायगी पर 6.40 खर्च हो रहे हैं।

35 हजार करोड़ से ज्यादा का कर्ज

हिमाचलसरकार पर 35 हजार करोड़ से ज्यादा का कर्ज है। राज्य में अब तक रही भाजपा-कांग्रेस की सरकारों के समय में कर्ज की राशि बढ़ती रही है। प्रदेश में पिछले कुछ सालों से ऋण का अधिक बोझ पड़ने का एक प्रमुख कारण 13वें वित्तायोग का गलत आकलन बताया जाता है। इसके कारण प्रदेश को 10,725 करोड़ रुपए कम मिले हैं। इसी तरह केंद्र सरकार ने लंबे समय से प्रदेश को उदार वित्तीय मदद भी नहीं दी है।

2,700 करोड़रुपए तक इस साल सरकार ऋण ले सकती है। राज्य सरकार अभी तक अपने वित्त वर्ष के ऋण कोटे का पचास फीसदी अगस्त महीने तक ही पूरा कर चुकी है। मार्च तक राज्य सरकार को अपना कोेटे के तहत लोन लेकर खर्च चलाना है। अक्टूबर में सरकार 200 से 300 करोड़ रुपए के बीच ऋण ले सकती है। केंद्र सरकार की तरफ से यदि इस ऋण को लेने की अनुमति दी जाती है, तो प्रदेश पर और ऋण बढ़ जाएगा। हालांकि सितंबर में सरकार ने किसी तरह का कर्ज नहीं लिया।