एचपीयू के जर्नलिज्म विभाग में भी घपला
हिमाचलप्रदेशविश्वविद्यालय में फर्जी मार्कशीट के बाद अब नियमों को ताक पर रखकर पीएचडी में एडमिशन का मामला सामने आया है। विवि प्रशासन पर आरोप है कि जर्नलिज्म विभाग में एक छात्र को नियमों की अनदेखी कर एडमिशन दी गई। इसके लिए तो विज्ञापन निकाला गया और ही अन्य नियमों को देखा गया है। उक्त छात्र नेट और जेआरएफ पास भी नहीं हैं। ऐसे में नियमों को ताक पर रखकर एडमिशन दी गई है। छात्र संगठन एसएफआई ने इस मामले को लेकर डीन आॅफ स्टडीज को ज्ञापन सौंपा। ऐसे में प्रशासन की ओर से इस मामले की जांच का आश्वासन मिला हैं। एसएफआई के कैंपस सचिव विक्रम कायथ का कहना है कि जर्नलिज्म विभाग में छात्र को बेवजह ही एडमिशन दे दी गई हैं। जबकि वह नियमों को पूरा नहीं करता है। ऐसे में इस मामले की जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि प्रशासन ने जांच करने का आश्वासन दिया है।
येहै नियम : यूजीसीके तय मानकों के तहत पीएचडी में प्रवेश को पात्रता शर्तें रखी हैं। आवेदनकर्ता के मास्टर डिग्री में सामान्य वर्ग के लिए 55 और एससी/एसटी को 50 फीसदी अंक या विवि के आर्डिनेंस के मुताबिक विदेशी विवि से इसके समकक्ष डिग्री। नेट/नेट-जेआरएफ/इंस्पायर/राजीव गांधी नेशनल फेलोशिप/डीबीटी/एसएलईटी और एचपीयू के 16.12 की आठ नवंबर को जारी अधिसूचना के मुताबिक एमफिल, एलएलएम में प्रवेश परीक्षा पास कर प्रवेश पा चुके छात्र भी पात्र होंगे।
नई व्यवस्था से ये लाभ
>पीएचडी में साल में दो बार शेड्यूल के मुताबिक प्रवेश प्रक्रिया पूरी होगी।
> प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।
> पीएचडी करने वाले छात्रों को सूचना मिलेगी, जिससे वे आवेदन कर पाएंगे।
> जो विभाग अपने स्तर पर पीएचडी में प्रवेश देते थे, वह नहीं होगा।
> प्रवेश प्रक्रिया पर एचपीयू प्रशासन की नजर रहेगी।
इनके पद किए थे प्रशासन ने विज्ञापित
बायोसाइंस,एजूकेशन, लॉ, फिजिक्स, जियोग्राफी, संस्कृत, इतिहास, कंप्यूटर साइंस और बायो टेक्नोलॉजी विभाग की खाली पीएचडी सीटों के लिए विज्ञापन दिए गए गए थे। जबकि अन्य विभागों में सीटें होने का हवाला दिया गया था।
पीएचडी में एडमिशन के लिए विवि में ये हैं नियम
>पीएचडी में एडमिशन के लिए यूजीसी के नियमों के अनुसार छात्र का नेट और जेआरएफ पास होना जरूरी हैं।
> यदि नेट और जेआरएफ छात्रों की संख्या कम है और सीटें ज्यादा बच रही है तो नियमों के अनुस