फोरलेन की राह में संस्थाएं रोड़ा
हिमाचलमेंप्रस्तावित फोरलेन सड़कों के रास्ते में कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन का विवाद बड़ी बाधा बनता दिख रहा है। इसमें एनजीआे आैर स्थानीय लोगों की आेर से हो रहे विवाद के चलते हाईवे अथॉरिटी के अधिकारियों ने राज्य के सभी फोरलेन पर दोबारा से विचार करने के लिए पत्र भेजने का फैसला लिया है। अधिकारियों ने इस पत्र को तैयार कर लिया है, सोमवार को इसे भेजा जाना है। इससे हिमाचल के परवाणू-शिमला और नेरचौक-मनाली फोरलेन प्राेजेक्टों के साथ-साथ नई सड़कें बनाने पर संकट सकता है। इसके लिए परवाणू-शिमला और नेरचौक मनाली फोरलेन के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने केंद्र सरकार नेशनल हाईवे अथाॅरिटी आॅफ इंडिया के आला अधिकारियों को पत्र लिखा है। पत्र के माध्यम से उन्होंने केंद्र सरकार आला अधिकारियों को हिमाचल में बन रहे प्रोजेक्टों में रही बाधाओं के बारे में बताया है।
तर्क दिया है कि हिमाचल में बन रहे नेशनल हाईवे के प्रोजेक्टों में स्थानीय एनजीओ नेताओं का अधिक वर्चस्व रहता है। वह प्रोजेक्टों में बाधाएं डालते हैं। ऐसे में निर्माण कार्य में जुटी कंपनियों को अपने कार्य पूरे करने में दिक्कतें आती है। प्रदेश में चल रहे किसी भी प्रोजेक्ट तय सीमा में बना पाना मुश्किल है। उन्होंने हिमाचल के लिए नए प्रोजेक्ट देने पर भी दोबारा से विचार करने की सिफारिश की है।
7 हजार करोड़ से अिधक के प्रोजेक्ट हिमाचल में प्रस्तावित
अबतक हिमाचल में सात हजार करोड़ से अधिक के प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं। इसमें परवाणू-शिमला फोरलेन 3300 करोड़, कीतरपुर-नेरचौक 1818 करोड़, नेरचौक-मनाली 2356 करोड़ के प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इसके अतिरिक्त कंदरौर पुल से हमीरपुर तक भी लोक निर्माण विभाग की ओर से 6500 करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। इसे भी मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा गया है। ऐसे में अब इस प्रोजेक्ट के पास होने पर भी संदेह है।
हिमाचल में प्रस्तावित फोरलेन के निर्माण कार्य में संबंधित कंपनियों को परेशानियों रही है। कीतरपुर-नेरचौक में आय दिन एनजीओ के कारण कार्य बाधित हो रहा है। इसके अतिरिक्त परवाणू-शिमला, नेरचौक-मनाली समेत अन्य निर्माण कार्य भी स्थानीय लोगों फोरेस्ट क्लीयरेंस के कारण काफी पिछे जा चुके हैं। इन प्रोजेक्टों की कॉस्ट भी तीन गुना तक बढ़ चुकी है।
परवाणू-शिमला नेरचौक-मनाली फोरलेन की टेंडर प्रक्रिया जारी है। नेशनल हाईवे अ