पीटीए का मामला फिर लॉ विभाग को भेजा
राज्यकेस्कूलों में कार्यरत पीटीए शिक्षकों को अनुबंध पर लाने में नियमों में छूट मिल सकती है। राज्य सरकार ने लीगल ओपिनियन लेने के लिए मामला लॉ डिपार्टमेंट को भेजा है। इस के तहत पीटीए आधार पर लगे शिक्षकों को 8 के बजाए 7 साल पूरा करने के बाद ही उन्हें अनुबंध पर लाया जाएगा। गैप पीरियड (आंदोलन के चलते स्कूल से गैर हाजिरी) को शिक्षकों के सेवाकाल में जोड़ा जाएगा।
राज्य सरकार द्वारा गठित हाईपावर कमेटी ने पहले यह सुझाव दिया था। मामला कोर्ट में विचाराधीन होने के चलते सरकार इस पर पहले कोई फैसला नहीं ले पाई थी। ऐसे में विधि विभाग यदि सात साल में अनुबंध पर लाने के लिए सहमति जता देता है तो इस से 6800 पीटीए शिक्षकों को राहत मिलेगी। अनुबंध पर लाने की अवधि यदि 8 साल होती है तो पहले चरण में 3200 के करीब शिक्षक अनुबंध पर आएंगे। यदि इस अवधि को 7 साल कर दिया जाता तो 5 हजार से अधिक शिक्षक पहले ही साल अनुबंध पर जा जाएंगे।
कांग्रेस ने चुनाव से पहले किया था रेग्युलर करने का वादा
राज्यमें विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस ने पीटीए शिक्षकों को रेग्युलर करने का वादा किया था। इसके बाद सरकार बनने के बाद पहली ही मंत्रिमंडल की बैठक में इनके मानदेय में सरकार ने भारी बढ़ोतरी का फैसला लिया है। इसके साथ ही इन्हें अनुबंध पर लाने के लिए नीति तैयार करने का फैसला लिया।
पीटीए को अनुबंध पर लाने पैरा शिक्षकों को नियमित करने की प्रक्रिया शिक्षा विभाग ने शुरू कर दी है। विभाग ने ऐसे पीटीए शिक्षक जो 31 मार्च तक 8 साल का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं, उनका डाटा मांगा है। पैरा शिक्षकों का रिकार्ड भी मांगा गया है। रिकार्ड आने के बाद इस पर आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। पीटीए शिक्षकों ने की कैविएट फाइल हाईकोर्ट से अस्थाई शिक्षकों को हटाने का फैसला आने के बाद बेरोजगार शिक्षक इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी में थे। इस से पहले पीटीए शिक्षकों ने कोर्ट में केविएट फाइल कर दी है। इस के तहत अब प्रदेश उच्च न्यायालय के फैसले को कोई दूसरे कोर्ट में चुनौती नहीं दे सकता। पीटीए के राज्य अध्यक्ष विवेक मेहता ने यह कैविएट फाइल की है। दूसरी तरफ पैरा शिक्षक भी इसको लेकर कैविएट फाइल करने की तैयारी में है।