एचपीयू में बनाई गई कमेटियां सवालों में
हिमाचलप्रदेश विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में गई है। प्रशासन की ओर से जो जांच कमेटियां बनाई गई है, वह अभी तक अपनी रिपोर्ट नहीं सौंप पाई है। ऐसे में जितनी कमेटियों का गठन प्रशासन की ओर से किया गया है, वह अपनी रिपोर्ट को सौंपने में नाकाम साबित हो रही है। हाल ही में सुर्खियों में आए फर्जी मार्कशीट मामले को लेकर प्रशासन ने कमेटी का गठन किया हुआ है। पुलिस जांच के बाद इसके आरोप में असिस्टेंट रजिस्ट्रार गिरफ्तार होने के बाद रिहा भी हो गए, लेकिन प्रशासन की रिपोर्ट अभी तक नहीं आई। अभी जांच के लिए कमेटी ने 10 दिन का और समय मांगा है। ऐसे में सवाल उठ रहे है कि प्रशासन ऐसा कौन सी जांच कर रहा है, जिसकी रिपोर्ट अभी तक नहीं बन पाई है। प्रशासन का कहना है कि रिपोर्ट को जल्द ही सौंप दिया जाएगा। प्रो वीसी प्रो. राजेंद्र सिंह चौहान का कहना है कि सभी गठित कमेटियां जल्द ही अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
जातिसूचक शब्द मामले की रिपोर्ट भी नहीं सौंपी
एचपीयूके रजिस्ट्रार पर दर्ज की गई एफआईआर मामले की रिपोर्ट भी अभी तक कमेटी ने नहीं सौंपी है। इस कारण एचपीयू पर आरोप लग रहे है कि मामले को रफा दफा करने की कोशिश हो रही है। मामले को हुई तीन सप्ताह से अधिक समय हो गया है, जबकि कमेटी की रिपोर्ट को कुलपति को भी नहीं साैंपा गया है। पुलिस की ओर से भी इस मामले में अभी तक पूछताछ चल रही है।
फीसवृद्धि का मामला सरकार पर छोड़ा
छात्रोंपर फीस का बोझ डालकर इस पूरे मामले को सरकार पर डाला गया है। जबकि एचपीयू खुद छात्रों से बढ़ी हुई फीस की दरें वसूल रहा है। इसी तरह सरकार ने भी अभी तक कमेटी की रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया है। एचपीयू ने कॉलेज छात्रों से पांच सौ रुपए मेंटनेंस फीस लेना भी शुरू किया है। अब प्रशासन फीस वृद्धि मामले में चुप्पी साधे हुए हैं।
>अभी जांच के लिए कमेटी ने 10 दिन का और समय मांगा