प्रदेश में बदलेगी दवा खरीद प्रक्रिया
प्रदेशके अस्पतालों के लिए अब खाद्य आपूर्ति निगम दवाइयों की सप्लाई नहीं करेगा। दवाइयों की खरीद स्वास्थ्य विभाग खुद करेगा। दवाइयों की नई खरीद प्रक्रिया के पीछे समय पर दवाइयों की सप्लाई से अधिक खर्चा होने का तर्क दिया जा रहा है। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग दावा कर रहा है कि इस प्रक्रिया से अस्पतालों में दवाइयों की कमी दूर होगी आैर सरकार के दवा खर्च में भी कमी की जा सकेगी। विभाग की आेर से निगम को वर्तमान में दवा खरीद पर कमीशन अदा की जाती है। नई खरीद प्रक्रिया पर काम भी शुरू हो चुका है इसके तहत कंपनियों की स्क्रूटनिंग करनी शुरू कर दी है। दवाइयाें की सप्लाई करने के लिए 82 के करीब कंपनियों ने अप्लाई किया है। अप्लाई करने वाली कंपनियाें के पूरे दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
निगमसौंपेगा रिपोर्ट
दवाकंपनियों की सूची तय करने का काम खाद्य आपूर्ति निगम ही करेगा। निगम ने कंपनियाें की सूची तैयार करने का काम भी शुरू कर दिया है। प्रदेश के अस्पतालों में जरूरी दवाइयाें की लिस्ट के मुताबिक सप्लाई करने के लिए 82 के करीब कंपनियों ने अप्लाई किया। निगम पहले कंपनी के दस्तावेज चैकिंग कर रहा है। इसके बाद जिस कंपनी के दस्तावेज नियमों के मुताबिक सही पाए जाएंगी उनके टेंडर ही खोले जाएंगी।
निगमखरीदता है दवा
अबतक अस्पतालों में दवाइयों की सप्लाई का जिम्मा खाद्य आपूर्ति के पास था। स्वास्थ्य विभाग दवाइयों की सप्लाई कराने के लिए अलग से निगम को पैसे देता था। कंपनियों के टेंडर से लेकर उनसे आने वाली सप्लाई का पूरी जिम्मेवारी निगम की रहती थी। जिस अस्पताल को जितनी दवाइयां चाहिए होती थी। वहां का सीएमआे दवाइयाें का इंडेंट बना कर निगम को भेज देता था। इसके बाद दवा कंपनियों को यह ऑडर जाता था। खाद्य आपूर्ति निगम ही टेंडर भी करता था।
पहलेयह थी प्रक्रिया
अभीतक दवाइयों की सप्लाई ऑडर देने से पहले स्वास्थ्य विभाग को ऑडर के मुताबिक पूरा पैसा निगम के खाते में जमा करवाना पड़ता था। इसके बाद ही निगम दवाइयों की सप्लाई का ऑडर कंपनियों को देता था। दवाइयों की सप्लाई कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग अलग से चार फीसदी खाद्य आपूर्ति निगम को देता था। स्वास्थ्य विभाग 30 से 40 करोड़ की दवाइयां खरीदता था। इसके अनुसार निगम को चार करोड़ की कमाई होती थी।
^नई खरीदप्रक्रिया से अस्पतालों में दवाइयों की कमी नही रहेगी। इसके लिए