पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • रतुआ :वैज्ञानिक खेतों में बताएंगे बचाव के तरीके

रतुआ :वैज्ञानिक खेतों में बताएंगे बचाव के तरीके

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
गेहूंमेंलगने वाले रतुआ रोग की रोकथाम के लिए वैज्ञािनक खेतों में जाकर बचाव की तरकीब बताएंगे। वे रतुआ के उपचार, दवाओं और रासायनिक विधियों को विस्तार से किसानों से साझा करेंगे। 20 दिसंबर के बाद भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान करनाल और शिमला के वैज्ञानिकों की टीम दौरा शुरू करेगी। हर क्षेत्र के लिए इसका खाका तैयार कर लिया गया है। सोलन के नालागढ़, बद्दी, बरोटीवाला समेत ऊना, बिलासपुर में दौरा होगा। इन क्षेत्रों में गेहूं की फसल पैदा हो चुकी है। इसी समय फसल पर रतुआ रोगों का अटैक सबसे अधिक होता है।

गेहूं अनुसंधान संस्थान शिमला के क्षेत्रीय प्रभारी डाॅ. एससी भारद्वाज ने कहा िक रतुआ रोगों की रोकथाम के लिए वैज्ञानिक अब खेतों में जाकर किसानों को उपचार बताएंगे। इसके लिए 20 दिसंबर के बाद वैज्ञानिकों का शैड्यूल तैयार कर लिया गया है।

30% फसलें खराब

वैज्ञानिकोंकादावा है कि गेहूं की तीस से चालीस फीसदी फसलें प्रतिवर्ष रतुआ रोगों से खराब हो जाती हैं। इसका मुख्य कारण समय पर इन रोगों के रोकथाम का उपाय करना है। यह रोग तब लगता है जब फसल छोटी होती है। इसका कारण मिट्टी में उपजाऊ क्षमता की कमी और अन्य कई कारण होते हैं। ऐसे में जब वैज्ञानिक खेतों में खुद जाकर रोगों पर रिसर्च करेंगे और किसानों को इसके बारे में बताएंगे तो उन्हें आसानी से इस रोग से निपटने के बारे में पता चल सकेगा।

ऐसे करें उपचार

यदिगेहूंरतुआ की चपेट में जाए तो इसके लिए ट्रापीकोना जोन नाम दवा का छिड़काव करें। यह एक ग्राम दवा एक लीटर पानी में डालकर इसका छिड़काव गेहूं की फसल पर करने से यह रोग कम पड़ जाता है। दो-तीन बार छिड़काव करने से यह पूरी तरह से फसल को ठीक करने में सहायक होता है। इसके अतिरिक्त कृषि विशेषज्ञों से भी इसके लिए सलाह ली जा सकती है।

क्या है रतुआ रोग : रतुआगेहूं में लगने वाली बीमारी है। ये कई प्रकार की होती है। इसमें पीला रतुआ, काला रतुआ, भूरा रतुआ समेत अन्य बीमारियां गेहूं की फसल पर अटैक करती हैं। पीले रतुए से गेहूं की फसल पूरी तरह से पीली हो जाती है। इसके लिए काले और भूरे रतुए से गेहूं में कालापन जाता है। इससे गेहूं का दाना बढ़ने से बंद हो जाता है तथा वह खराब हो जाता है। इस रोग का इलाज वैज्ञानिकों के पास है। मगर कई क्षेत्रों में किसानों को अभी तक उसकी जानकारी नहीं है। वैज्ञानिक किसानों को इसके बार