रूसा का बजट खर्चने में नियमों की अनदेखी
राष्ट्रीयउच्चतरशिक्षा अभियान (रूसा) के तहत बजट अावंटन में नियमों की पूरी तरह अनदेखी हुई है। केंद्र से बजट की पहली किश्त के रूप में मिले 8.85 करोड़ रुपए कॉलेजों को बांट दिए लेकिन राज्य सरकार ने अपना 10 फीसदी शेयर इसमें शामिल ही नहीं किया। योजना के तहत 90:10 के अनुपात में बजट खर्च करने की बात कही गई है।
शिक्षा विभाग ने कॉलेजों को 31 दिसंबर तक बजट खर्च करने की डेडलाइन भी तय कर दी है। राज्य का शेयर जारी होने से कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं। सूत्र बताते हैं कि राज्य की वित्तीय स्थिति ठीक होने के चलते स्टेट शेयर शामिल नहीं किया जा सका। रूसा लागू होने के डेढ़ साल बाद हिमाचल को पहली ग्रांट के रूप में 8.85 करोड़ रुपए मिले थे। इनमें 2.25 करोड़ विश्वविद्यालय को मिले हैं। बाकी बजट कॉलेजों में डिस्ट्रीब्यूट किया गया है। सितंबर महीने में यह बजट केंद्र से अप्रूव हुआ था। करीब एक महीने तक मामले की फाइल सचिवालय में घूमती रही थी।
न्यू प्रोफेशनल कॉलेज के लिए 26 करोड़ का बजट अप्रूव हुआ है। पहली किस्त के रूप में 8.85 करोड़ मिले हैं। पहले साल 13 करोड़ मिलना प्रस्तावित है। इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रांट कुल 20 करोड़ अप्रूव, पहले साल 10 करोड़ मिलेगा। न्यू मॉडल कॉलेज के लिए 24 करोड़ का बजट अप्रूव हुआ है। पहले साल 12 करोड़ मिलेगा। अपग्रेडेशन कॉलेज टू मॉर्डन कॉलेज के लिए 4 करोड़ अप्रूव हुआ है। पहले साल 2 करोड़ मिलेगा। 25 कॉलेजों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रांट मिलना प्रस्तावित है। इन कॉलेजों को 1-1 करोड़ मिलेगा। 30 कॉलेजों को इक्विटी इनेशेटिव ग्रांट मिली है।
रूसा के बजट आवंटन में नियमों की अनदेखी का खामियाजा राज्य को भुगतना पड़ सकता है। नियमों के पहले से स्पष्ट है कि पिछला बजट खर्च करने पर अगली ग्रांट मिलेगी। प्रोजेक्ट अप्रूव बोर्ड (पीएबी) की अगली बैठक में राज्य को अप्रूव बजट पर हुए कार्य की समीक्षा की जाएगी। राज्य द्वारा खर्च किए गए बजट की प्रोग्रेसिव रिपोर्ट भी देखी जाएगी। नियमों को पूरा करने पर केंद्र रूसा की अगली ग्रांट रोक सकता है।