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होम्योपैथी से संभव है जोड़ों के दर्द का इलाज
जोड़ोहड्डियों में दर्द के कारण जो लोग चल फिर नहीं सकते थे जिन्हें एक ही जगह बैठना पड़ता था जल्द ही अब खुद अपने पैरों पर चल सकेंगे। जोड़ों में दर्द होने के कारण मरीजों को बैठने में भी खासी परेशानी दर्द सहन करना पड़ता था। होम्योपैथी ने इसका इलाज ढूंढ लिया है।
जोड़ों के दर्द से शिकार मरीज अब जल्द ही रोग मुक्त हो सकेंगे। रोग पर शोध के बाद आयुर्वेद एवं होम्योपैथी अनुसंधान केंद्र ने इसका इलाज खोज निकाला है। उनका दावा है कि जोड़ों के दर्द से ग्रस्त मरीजों पर रिसर्च की गई है। उन्हें होम्योपेथी की दवा दी गई पहली डोज से ही रोगियों में दवा का असर दिखने लगा। पांच से छह माह बाद जब रोगी टेस्ट कराने आए तो वे पूरी तरह स्वस्थ निकले। इससे पहले एलोपैथी से इस बीमारी का लंबा इलाज चलता था कई बार ऑपरेशन तक कराने पड़ते थे।
शिलांगनोएडा में भी इलाज संभवः आयुर्वेदएवं होम्योपैथी शिमला के साथ रिसर्च इंस्टीट्यूट होम्योपैथी सेंटर शिलांग नोएडा में भी इलाज किया जा सकेगा। रिसर्च के बाद इन संस्थानों में भी रोगियों को दवा देनी शुरू कर दी है। होम्योपैथी के अन्य संस्थानों में भी जल्द ही दवा उपलब्ध करा दी जाएगी ताकि रोगियों को लाभ मिल सके।
निशुल्क इलाज
एलोपैथीसे जहां जोड़ों के दर्द से छुटकारा पाने के लिए हजारों रुपए खर्च करने पड़ते थे। कई बार ऑपरेशन तक कराना पड़ता है वहीं होम्योपैथी से यह इलाज बिना किसी राशि के निशुल्क हो सकेगा। रोगियों को केवल परहेज के निर्देश दिए जाते है ताकि दवा जल्द से अपना असर शुरू कर सके।
^जोड़ों के दर्द को लेकर शोध किया गया है जो कि सफल रहा है। इस दवा से रोगियों का काफी लाभ मिला है। यह दवा आयुर्वेद एवं होम्योपैथी अस्पताल में निशुल्क दी जा रही है ताकि रोगी बीमारी से जल्द छुटकारा पा सके। डॉएके गुप्ता, मुख्य चिकित्सक आयुर्वेद एवं होम्योपैथी अस्पताल
50 फीसदी लोग इस बीमारी से ग्रस्त
चिकित्सकोंका दावा है कि हिमाचल में 50 फीसदी तक लोग जोड़ों के दर्द से ग्रस्त हैं। इस बीमारी के कारण लोगों को चलने फिरने बैठने उठने में खासी परेशानी दर्द होता है। इसके अलावा महिलाएं इस बीमारी से ग्रस्त होती हैं, जिसका कारण बच्चों को जन्म देने के बाद शरीर में पोषक तत्वों में कमी होना पाया गया है। इस बीमारी के कारण जोड़ों में, कमर में दर्द आनी शुरू हो जाती है। अगर समय पर इसका इलाज हो तो चलना फिरना भी बंद हो सकता है।