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पर्वतीय राज्यों के लिए बने स्थाई क्षेत्रीय परिषद

6 वर्ष पहले
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दिल्लीमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने रविवार को पर्वतीय राज्यों के लिए स्थायी क्षेत्रीय परिषद के सृजन का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि नीति आयोग को आज के परिप्रेक्ष्य में अधिक प्रासंगिक बनाने के सुझाव दिये। उन्होंने विशेषकर, पर्वतीय राज्यों के लिए स्थाई क्षेत्रीय परिषद आैर अलग से हिल डिवीजन सृजित करने और लोगों की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए इन राज्यों को विशेष श्रेणी राज्य का दर्जा देने के सुझाव दिए उन्होंने नीति आयोग में प्रस्तावित हिल डिवीजन को इस क्षेत्रीय परिषद के लिए स्थाई सचिवालय के रूप में उपयोग करने का भी सुझाव दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक मेें नीति आयोग के उपाध्यक्ष डाॅ. अरविंद पनगढ़िया, केंद्रीय मंत्री, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों आैर केंद्र शासित प्रदेशों के राज्यपालों ने बैठक में भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य योजना आयोग के स्थान पर गठित इस नये संस्थान को सही स्वरूप देना।

मंचबरकरार रखने का सुझाव

राज्योंको रोटेशन के आधार पर प्रतिनिधित्व देने का सुझाव भी मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने बैठक में दिया। पर्वतीय राज्यों के समक्ष प्रस्तुत चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए विशेष केंद्रीय सहायता एवं विशेष योजना सहायता के रूप में वार्षिक योजनाओं के वित्त पोषण के लिए संसाधन आबंटन जारी रखने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने वार्षिक योजनाओं को अंतिम रूप देने के लिए नीति आयोग के उपाध्यक्ष एवं मुख्यमंत्रियों के मध्य आैर आयोग के सीईओ एवं मुख्य सचिवों के मध्य विचार-विमर्श की प्रक्रिया को जारी रखने का भी सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि रोजगार क्षमता को बढ़ावा देने के लिए तथा औद्योगिक क्षेत्र में कुशल कार्यशक्ति की मांग को पूरा करने के लिए युवाओं के कौशल विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

छोटेराज्यों मेें पहुंचे मेक इन इंडिया

मुख्यमंत्रीने औद्योगिक विकास के लिए सही वातावरण निर्मित करने की बात पर बल दिया। उन्होंने पहाड़ी एवं विशेष श्रेणी राज्यों में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज प्रदान करने की मांग की। ‘मेक इन इंडिया’कार्यक्रम केवल पहले से ही औद्योगिक रूप से विकसित राज्यों तक ही सीमित रहें।

वन मंजूरी की प्रक्रिया सरल करें केंद्र

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने पहाड़ी राज्यों के संदर्भ में वन संरक्षण अधिनियम के तहत शक्तियों के प्रत्यायोजन का मामला उठाया।

सड़क निर्माण को अनुमेय परियोजनाओं की सूची में रखने का सुझाव दिया, ताकि विभिन्न विकासात्मक परियोजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। उन्होंने जलविद्युत परियोजनाओं के लिए पर्यावरण स्वीकृतियां जारी करने के लिए राज्यों को शक्तियां प्रदान करने का मामला उठाया ताकि शीघ्र स्वच्छ ऊर्जा का संपूर्ण दोहन किया जा सके।

मांग के अनुरूप बजट

दें केंद्र

मुख्यमंत्रीने सुझाव दिया कि इस योजना के लिए केंद्र से मिलने वाली धनराशि राज्यों की मांग के अनुरूप मिलनी चाहिए। उन्होंने अवगत करवाया कि समाज के कमजोर तबकों के लाभ के लिए आरंभ की गई केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं के क्रियान्वयन में हिमाचल प्रदेश का रिकाॅर्ड काफी अच्छा है। उन्होंने केंद्र से मिलने वाली धनराशि एवं परियोजनाएं स्वीकृत करते समय हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों के प्रति उदार रवैया अपनाए।

दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करते मुख्यमंत्री वीरभद्र िसंह।