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हिमाचल में कहां खर्च हो रहा स्वास्थ्य विभाग का पैसा, अब होगी पड़ताल

6 वर्ष पहले
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हिमाचलमें स्वास्थ्य सेवाआें पर प्रति व्यक्ति 1650 रुपए खर्च किए जाते हैं, हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर जारी रिपोर्ट में साफ है कि किसी राज्य में यदि प्रति व्यक्ति 1500 रुपए का बजट रखा जाता है तो राज्य में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दी जा सकती हैं। प्रदेश में गठित स्वास्थ्य आयोग ने दिल्ली में हुई बैठक में इस मसले पर लंबी चर्चा की। अब स्वास्थ्य विभाग ने फैसला लिया है कि राज्य में स्वास्थ्य पर इतना पैसा खर्चने के बावजूद लोगों तक इसका पूरा लाभ क्यों नहीं मिल पा रहा है। इसके लिए पूरे विभाग की कार्यप्रणाली को खंगालने की तैयारी है।

राज्य में स्वास्थ्य संस्थानों की पहले ही कमी नहीं है। राज्य सरकार की आेर से आैर नए संस्थान खोले जा रहे हैं। कई छोटे संस्थानों को अपग्रेड किया जा रहा है। राज्य में डाक्टरों का कैडर 300 बढ़ाया गया है। पैरामेडिकल से लेकर अन्य स्टाफ को तैनाती करने की प्रक्रिया लगातार जारी है। इसके बावजूद हिमाचल में स्वास्थ्य सेवाआें पर सवाल क्यों उठते है। राज्य स्वास्थ्य विभाग में इसका पूरा खाका तैयार किया जाएगा। विभाग में हो रहे खर्च की पूरी डिटेल जिलों से आने के बाद विभाग में इसे रिव्यू किया जाएगा।

प्राइमरी आैर सेकंडरी स्तर पर स्वास्थ्य पर प्रति व्यक्ति खर्च 100 से 300 रुपए तक काफी होता है, लेकिन आईजीएमसी आैर टांडा के स्तर पर 700 से 800 रुपए प्रति व्यक्ति आय खर्च आता है। इन दोनों संस्थानों को मजबूत बनाकर लोगों को दी जाने वाली सेवाआें को बेहतर करने के लिए प्लान तैयार किया जाएगा।

अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य विनीत चौधरी ने माना कि दिल्ली में राज्य स्वास्थ्य आयोग के सदस्यों की बैठक हुई थी। इस बैठक में राज्य में प्रति व्यक्ति हो रहे खर्च पर मंथन किया। यह कमीशन की रिपोर्ट के मुताबिक ज्यादा है। इसमें कैसे सुधार हो सकता है। इसके लिए राज्य में विभाग के सभी कार्यों को रिव्यू किया जाएगा। 1500 रुपए में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं दी जा सकती हैं। राज्य में 1650 रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इसमें कहां कमी है, इसे तलाश पर लोगों को बेहतर सुविधाएं मुहैया करवाई जाएंगी।

यहां आती है दिक्कत

प्रदेशके बड़े अस्पतालों में चिकित्सकों आैर अन्य स्टाफ की आेर से किए जा रहा व्यवहार मरीज आैर तीमारदारों के लिए कई मर्तबा परेशानी का सबब बनता है। इसमें सुधार के लिए डाक्टर, नर्स सहित हर पैरामेडिकल स्टाफ के हर काम को लिखित रूप में वार्ड में लिखा जाएगा। इससे हर कर्मचारी को पता होगा कि उसकी क्या डयूटी है। इसे पूरा करने पर जवाबदेही किसकी होगी। इससे यह स्थिति भी क्लीयर हो सकेगी।

1500 रुपए खर्च कर बेहतर मिलती है स्वास्थ्य सेवाएं, हिमाचल में हो रहा 1650 का खर्च